Multiplier/मल्टीप्लायर: सरसों की खेती मल्टीप्लायर के साथ:
बुवाई करने के पूर्व बीजों को मल्टीप्लायर के साथ बीजोपचार करें, बीजोपचार करने की विधि अलग से बताई गई है |
एक एकर में २ किलो मल्टीप्लायर जमीन से देना है, मल्टीप्लायर जमीन से देने की विधि अलग से बताई गई है.
छिड़काव से फसल पर ज्यादा अच्छा और तुरंत परिणाम मिलता है, इसलिए जमीन से देने के साथ-साथ प्रति सप्ताह १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर + २ मिली ऑल क्लियर मिलाकर छिड़काव करें.
रासायनिक खाद एकदम से बंद नहीं करना है, उसका प्रमाण २० प्रतिसत कम करिये, जब आपको उत्पादन बढ़कर मिले, तब अगली फसल में रासायनिक खाद और कम करिये, कुछ सालों में आपका रासायनिक खाद शून्य हो जायेगा.
मल्टीप्लायर फसल को आवश्यकता से अधिक भोजन की उपलब्धता कराता है, इसलिए फसल के पत्तों का साइज बड़ा बनता है, पत्तों का कलर डार्क ग्रीन बनता है, फसल सूर्यउर्जा की मदत से ज्यादा भोजन बनाती है.
सरसों की फसल की ऊंचाई ४ से ५ फुट मिलती है, परन्तु मल्टीप्लायर का इस्तेमाल होने से कुछ किसान भाइयों को ऊंचाई ९ फुट तक मिली है, जो की अविश्वसनीय है, इतना ही नहीं नीचे से लेकर ऊपर तक प्रत्येक पत्ते के पास आपको सरसों की फली नजर आएगी.
पौधे की ऊंचाई बढ़ने से तथा प्रत्येक पत्ते के पास सरसों लगने से उत्पादन कम से कम ५० प्रतिसत तक बढ़कर मिलता है, प्रकार आप मल्टीप्लायर की मदत से ज्यादा से ज्यादा उत्पादन ले सकते है.
मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करने के कारण फसल को बढ़ाने के लिए, पत्तों को गहरे हरे रंग का बनाने के लिए, हमेशा के मुकाबले ज्यादा उत्पादन लेने के लिए दूसरे किसी उत्पादन की आवश्यकता नहीं पड़ती.
सरसों की फसल की अवधि के हिसाब से उचित अंतराल पर (कतार से कतार तथा पौध से पौध) 6 इंच चौड़ा तथा 8 से 10 इंच गहरा गड्ढा कर लें। इसे 2 से 3 दिनों के लिए छोड़ दें।1 एकड़ खेत हेतु 50 से 60 क्ंिवटल कम्पोस्ट खाद में 4 से 5 कि.ग्रा. ट्राइकोडर्मा, 27 कि.ग्रा. डीएपी, एवं 13.5 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश को अच्छी तरह मिला लें तथा प्रत्येक गड्ढे में बराबर मात्रा में इस खाद को डालकर 1 दिन के लिए पुन: छोड़ दें।डीएपी के स्थान पर तत्व के अनुपात में सुपर फॉस्फेट एवं यूरिया अथवा नत्रजन युक्त खाद का भी उपयोग किया जा सकता है।श्री विधि से सरसों की रोपाई:रोपाई के 2 घंटे पूर्व नर्सरी में नमी बना कर रख लें सावधानी पूर्वक मिट्टी सहित पोध को नर्सरी बेड से निकालें।नर्सरी से पौध निकालते समय यह ध्यान रखें कि पौध को खुरपा या कुदाल की सहायता से कम से कम 1 से 2 इंच मिट्टी सहित नर्सरी से निकालें।पौध को नर्सरी से निकालने के बाद आधा घंटे के अंदर गड्ढे में रोपाई कर दे।रोपाई पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि प्रत्येक गड्ढे में सावधानी पूर्वक मिट्टी सहित लगा दें ध्यान रखें कि रोपाई ज्यादा गहराई में ना हो।रोपाई के उपरांत 3 से 5 दिन तक खेत में नमी बनाकर रखें। ताकि पौधा खेत में अच्छी तरह से लग जाये।जहं मिट्टी भारी हो वहां सूखी रोपाई गोभी के समान करें तथा रोपाई के तत्काल बाद जीवन रक्षक सिचाई करें।फसल की देखरेख (रोपाई के 30 दिन तक)रोपाई के 15 से 20 दिन के अंदर पहली सिंचाई की जानी चाहिए। सिंचाई के 3 से 4 दिन बाद जब खेत में चलने लायक हो जाये तब 3 से 4 क्व्विन्टल वर्मीकम्पोस्ट में 13.5 कि.ग्रा. यूरिया मिलाकर जड़ों के समीप देकर कुदाल या खुरपा अथवा बीडर चला दें।दूसरी सिंचाई समान्यत: पहली सिंचाई के 15 से 20 दिन बाद करते हैं सिंचाई के पश्चात रोटरी बीडर/ कोनीबीडर अथवा कुदाल से खेत की गुड़ाई आवश्यक है। आवश्यकतानुसार पौधे पर हल्की मिट्टीभी चढ़ा दें।फसल की देखरेख (रोपाई के 35 दिन बाद)रोपाई के 30 दिन बाद से पोधे तेजी से बड़े होते हैं। साथ ही नई शाखाएं भी निकलती रहती हैं इसके लिए पौधों को अधिक नमी एवं पोषण की जरूरत होती है अत: रोपाई के 35 दिन बाद आवश्यकतानुसार तीसरी सिंचाई करें। सिंचाई के 3 से 4 दिन पश्चात जब खेत में चलने लायक हो जाये तब 13.5 कि.ग्रा. यूरिया एवं 13.5 कि.ग्रा. पोटाश को वर्मीकम्पोस्ट मेें मिलाकर जड़ों के समीप डालकर बीडर या कुदाल से अच्छी प्रकार मिट्टी हल्का कर जड़ों के उपर मिट्टी चढ़ा दें।मिट्टी नहीं चढ़ाने से पौधे के गिरने का डर रहता है एवं मिट्टी चढ़ाने से पौधे के फैलाव करने मदद मिलती है जिस प्रकार आलू की फसल में मिट्टी चढ़ाते है ठीक उसी प्रकार से कतार से कतार 1 फिट उचा तक श्री विधि से सरसों की खेती में भी मिट्टी चढ़ाना आवश्यक है।यान देने की यह बात है कि पौधे के ऊपर माही लाही एवं अन्य कीट का प्रकोप हो सकता है इससे बचने के लिए उचित प्रबंधन की आवश्यकता पड़ती हैपौधों में फूल आने लगते हैं, फूल आने एवं फलियों में दाने भरने के समय पानी की कमी नही होनी चाहिए अन्यथा उपज में काफी कमी हो जायेगी।
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बुवाई करने के पूर्व बीजों को मल्टीप्लायर के साथ बीजोपचार करें, बीजोपचार करने की विधि अलग से बताई गई है |
एक एकर में २ किलो मल्टीप्लायर जमीन से देना है, मल्टीप्लायर जमीन से देने की विधि अलग से बताई गई है.
छिड़काव से फसल पर ज्यादा अच्छा और तुरंत परिणाम मिलता है, इसलिए जमीन से देने के साथ-साथ प्रति सप्ताह १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर + २ मिली ऑल क्लियर मिलाकर छिड़काव करें.
रासायनिक खाद एकदम से बंद नहीं करना है, उसका प्रमाण २० प्रतिसत कम करिये, जब आपको उत्पादन बढ़कर मिले, तब अगली फसल में रासायनिक खाद और कम करिये, कुछ सालों में आपका रासायनिक खाद शून्य हो जायेगा.
मल्टीप्लायर फसल को आवश्यकता से अधिक भोजन की उपलब्धता कराता है, इसलिए फसल के पत्तों का साइज बड़ा बनता है, पत्तों का कलर डार्क ग्रीन बनता है, फसल सूर्यउर्जा की मदत से ज्यादा भोजन बनाती है.
सरसों की फसल की ऊंचाई ४ से ५ फुट मिलती है, परन्तु मल्टीप्लायर का इस्तेमाल होने से कुछ किसान भाइयों को ऊंचाई ९ फुट तक मिली है, जो की अविश्वसनीय है, इतना ही नहीं नीचे से लेकर ऊपर तक प्रत्येक पत्ते के पास आपको सरसों की फली नजर आएगी.
पौधे की ऊंचाई बढ़ने से तथा प्रत्येक पत्ते के पास सरसों लगने से उत्पादन कम से कम ५० प्रतिसत तक बढ़कर मिलता है, प्रकार आप मल्टीप्लायर की मदत से ज्यादा से ज्यादा उत्पादन ले सकते है.
मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करने के कारण फसल को बढ़ाने के लिए, पत्तों को गहरे हरे रंग का बनाने के लिए, हमेशा के मुकाबले ज्यादा उत्पादन लेने के लिए दूसरे किसी उत्पादन की आवश्यकता नहीं पड़ती.
सरसों की फसल की अवधि के हिसाब से उचित अंतराल पर (कतार से कतार तथा पौध से पौध) 6 इंच चौड़ा तथा 8 से 10 इंच गहरा गड्ढा कर लें। इसे 2 से 3 दिनों के लिए छोड़ दें।1 एकड़ खेत हेतु 50 से 60 क्ंिवटल कम्पोस्ट खाद में 4 से 5 कि.ग्रा. ट्राइकोडर्मा, 27 कि.ग्रा. डीएपी, एवं 13.5 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश को अच्छी तरह मिला लें तथा प्रत्येक गड्ढे में बराबर मात्रा में इस खाद को डालकर 1 दिन के लिए पुन: छोड़ दें।डीएपी के स्थान पर तत्व के अनुपात में सुपर फॉस्फेट एवं यूरिया अथवा नत्रजन युक्त खाद का भी उपयोग किया जा सकता है।श्री विधि से सरसों की रोपाई:रोपाई के 2 घंटे पूर्व नर्सरी में नमी बना कर रख लें सावधानी पूर्वक मिट्टी सहित पोध को नर्सरी बेड से निकालें।नर्सरी से पौध निकालते समय यह ध्यान रखें कि पौध को खुरपा या कुदाल की सहायता से कम से कम 1 से 2 इंच मिट्टी सहित नर्सरी से निकालें।पौध को नर्सरी से निकालने के बाद आधा घंटे के अंदर गड्ढे में रोपाई कर दे।रोपाई पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि प्रत्येक गड्ढे में सावधानी पूर्वक मिट्टी सहित लगा दें ध्यान रखें कि रोपाई ज्यादा गहराई में ना हो।रोपाई के उपरांत 3 से 5 दिन तक खेत में नमी बनाकर रखें। ताकि पौधा खेत में अच्छी तरह से लग जाये।जहं मिट्टी भारी हो वहां सूखी रोपाई गोभी के समान करें तथा रोपाई के तत्काल बाद जीवन रक्षक सिचाई करें।फसल की देखरेख (रोपाई के 30 दिन तक)रोपाई के 15 से 20 दिन के अंदर पहली सिंचाई की जानी चाहिए। सिंचाई के 3 से 4 दिन बाद जब खेत में चलने लायक हो जाये तब 3 से 4 क्व्विन्टल वर्मीकम्पोस्ट में 13.5 कि.ग्रा. यूरिया मिलाकर जड़ों के समीप देकर कुदाल या खुरपा अथवा बीडर चला दें।दूसरी सिंचाई समान्यत: पहली सिंचाई के 15 से 20 दिन बाद करते हैं सिंचाई के पश्चात रोटरी बीडर/ कोनीबीडर अथवा कुदाल से खेत की गुड़ाई आवश्यक है। आवश्यकतानुसार पौधे पर हल्की मिट्टीभी चढ़ा दें।फसल की देखरेख (रोपाई के 35 दिन बाद)रोपाई के 30 दिन बाद से पोधे तेजी से बड़े होते हैं। साथ ही नई शाखाएं भी निकलती रहती हैं इसके लिए पौधों को अधिक नमी एवं पोषण की जरूरत होती है अत: रोपाई के 35 दिन बाद आवश्यकतानुसार तीसरी सिंचाई करें। सिंचाई के 3 से 4 दिन पश्चात जब खेत में चलने लायक हो जाये तब 13.5 कि.ग्रा. यूरिया एवं 13.5 कि.ग्रा. पोटाश को वर्मीकम्पोस्ट मेें मिलाकर जड़ों के समीप डालकर बीडर या कुदाल से अच्छी प्रकार मिट्टी हल्का कर जड़ों के उपर मिट्टी चढ़ा दें।मिट्टी नहीं चढ़ाने से पौधे के गिरने का डर रहता है एवं मिट्टी चढ़ाने से पौधे के फैलाव करने मदद मिलती है जिस प्रकार आलू की फसल में मिट्टी चढ़ाते है ठीक उसी प्रकार से कतार से कतार 1 फिट उचा तक श्री विधि से सरसों की खेती में भी मिट्टी चढ़ाना आवश्यक है।यान देने की यह बात है कि पौधे के ऊपर माही लाही एवं अन्य कीट का प्रकोप हो सकता है इससे बचने के लिए उचित प्रबंधन की आवश्यकता पड़ती हैपौधों में फूल आने लगते हैं, फूल आने एवं फलियों में दाने भरने के समय पानी की कमी नही होनी चाहिए अन्यथा उपज में काफी कमी हो जायेगी।
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