Monday, December 11, 2017

दिसम्बर माह में किसान भाई क्‍या करें ? (What will the farmer brother do in December month?)

दिसम्बर माह में किसान भाई क्‍या-क्‍या करें ?

पशुओं से संबधित :- 
          कृमिनाशक दवाई पशु चिकित्सक की सलाह से समय – समय पर पिलायें |पशुओं को संतुलित आहार के साथ – साथ खनिज मिश्रण प्रतिदिन खिलायें |बरसीम अधिक खिलाने से पशुओं को अफारा हो सकता है, अफारे से बचाव के लिए बरसीम के साथ सूखा चारा मिला कर खिलायें |पशुओं को सर्दी से बचाव का उचित प्रबन्ध करें |पशुओं को खुरपका – मुंहपका रोग से बचाव का टीका लगवायें |दुधारू पशुओं को थैनेला रोग से बचाने के लिए पूरा दूध निकाले और दूध दोहन के बाद थनों को कीटाणु नाशक घोल में डुबोयें |बरसीम फसल को सर्दियों में 15 से 20 दिनों के अन्तर पर पानी अवश्य लगायें |जई फसल में पहला पानी 21 – 25 दिनों पर लगायें |
          पशु को आहार देने के कुछ मूल नियम: पशु का आहार संतुलित एवं नियंत्रित हो . उसे दिन में दो बार 8-10 घंटे के अंतराल पर चारा पानी देना चाहिए . इससे पाचन क्रिया ठीक रहती है एवं बीच में जुगाली करने का समय भी मिल जाता है. पशु का आहार सस्ता, साफ़, स्वादिष्ट एवं पाचक हो . चारे में 1/3 भाग हरा चारा एवं 2/3 भाग सूखा चारा होना चाहिए. पशु को जो आहार दिया जाए उसमें विभिन्न प्रकार के चारे-दाने मिले हों. चारे में सूखा एवं सख्त डंठल नहीं हो बल्कि ये भली भांति काटा हुआ एवं मुलायम होना चाहिए. इसी प्रकार जौ,चना, मटर, मक्का इत्यादि दली हुई हो तथा इसे पक्का कर या भिंगो कर एवं फुला कर देना चाहिए. दाने को अचानक नहीं बदलना चाहिए बल्कि इसे धीरे-धीरे एवं थोड़ा-थोड़ा कर बदलना चाहिए. पशु को उसकी आवश्यकतानुसार ही आहार देना चाहिए. कम या ज्यादा नहीं . नांद एकदम साफ होनी चाहिए, नया चारा डालने से पूर्व पहले का जूठन साफ़ कर लेना चाहिए. गायों को 2-2.5 किलोग्राम शुष्क पदार्थ एवं भैंसों को 3.0 किलोग्राम प्रति 100 किलोग्राम वजन भार के हिसाब से देना चाहिए |

दिसम्बर माह में किसान भाई क्या करें गेंहू की फसल:

 नवम्‍बर के प्रथम पखवाडे मे बोई गई गेंहू की फसल में सी.आर.आई. अवस्‍था में यानि‍ बुआई के 20-25 दि‍न बाद की 5-6 सें.मी. लम्‍बी पौध की अवस्‍था में सि‍चांई करे।दूसरी सि‍चांई कल्‍ले नि‍कलते समय (बुआई के 40-45 दि‍न बाद) करें।25 नवम्‍बर से 25 दि‍सम्‍बर तक सि‍ंचि‍त अवस्‍था में पछेती बुवाई के लि‍ए एच.डी 3059, एच.डी 2985, एच.डी. 2643 , डी.बी.डबल्‍यू – 14,16,71,90 की बुवाई करें।उपरोक्‍त कि‍स्‍मों की बीज दर 120 कि‍ग्रा/ हैक्‍टेयर रखें।सब्‍जि‍यॉं :टमाटर के पौधो की रोपाई इस माह में भी की जा सकती हैटमाटर की रोपाई से पहले पौध की जडों को पर्ण्‍ कुंचन के प्रकोप से बचाव के लि‍ए कन्‍फीडोर 200 एल.एस्‍. 100 मि‍ली दवा  500 लि‍टर पानी में घोलकर उपचारि‍त करेंपाले से बचाव के लि‍ए टमाटर तथा अन्‍य सब्‍जि‍यों के खेत में उचि‍त नमी बनाए रखने के लि‍ए लगातार अन्‍तराल पल सि‍चांई करें।टमाटर तथा मि‍र्च में पछेती झुलसा से बचाव हेतु 0.2 प्रति‍शत मैंकोजेब के घोल का छि‍डकाव करें।सरसों की फसलसरसों में बुवाई के 40-50 दि‍न बाद तथा दूसरी 90-100 दि‍न बाद करें।सरसों में सफेद रतुआ के नि‍यंत्रण के लि‍ए मेटालैक्‍सि‍ल 6 ग्राम प्रति‍ कि‍ग्राम या बैवि‍स्‍टि‍न 2 ग्रा. प्रति‍ कि‍लो बीज दर से उपचारि‍त करे।फल फसलें:  माह के अन्‍त में पेडों के तने पर मि‍ली बग नि‍यंत्रण के लि‍ए  पॉलि‍थीन शीट चढा दें।तने में हुए छि‍द्रों में 0.5 प्रति‍शत मोनेाक्रोटाफॉस डालकर छि‍द्रों कों चि‍कनी मि‍टटी से बंद कर दें।आम में मि‍लीबग कीट की रोकथाम के लि‍ए पौधों के तनों पर ग्रीस का लेप करें तथा उस पर धरातल से 30-40 से.मी ऊपर तक पॉलि‍थि‍न की पन्‍नी बांध दें। साथ ही कार्बोसल्‍फान  100 ग्राम दवा 100 लि‍टर पानी में घोलकार प्रति‍ पौधे की मि‍टटी मे डालें।

No comments:

Post a Comment