Thursday, December 21, 2017

मिर्ची और शिमला मिर्ची की खेती मल्टीप्लायर के साथ (Pepper and Cimmer pepper farming with multiplier)

मिर्ची और शिमला मिर्ची की खेती मल्टीप्लायर के साथ.

मल्टीप्लायर : Capsicum, शिमला मिर्ची  Chilli, मिर्ची : मिर्ची और शिमला मिर्ची की खेती मल्टीप्लायर के साथ.
       पौधों को खेत में लगाते समय २०० लीटर पानी में २०० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर तैयार किये गए घोल में से १०० मिली घोल प्रत्येक पौधे के रूट झोन में डालना है, मल्टीप्लायर का घोल डालने से पौधे जल्दी से मिटटी में सेट होकर नई जड़ें बनाने लगेंगे.

मिर्ची के पौधे खेत में लगाने के बाद हर महीने १ किलो मल्टीप्लायर जमीन से देना है. जब तक उत्पादन लेना है तब तक मल्टीप्लायर देना है, जमीन से मल्टीप्लायर देने का तरीका अलग से बताया गया है.

छिड़काव से फसल पर ज्यादा अच्छा और तुरंत परिणाम मिलता है, इसलिए जमीन से देने के साथ-साथ प्रति सप्ताह १५ लीटर पानी में १५  ग्राम मल्टीप्लायर + २ मिली ऑल क्लियर मिलाकर छिड़काव करें, इसमें कोई भी रासायनिक दवाई मिलाई जा सकती है.

रासायनिक खाद एकदम से बंद नहीं करना है, उसका प्रमाण २० प्रतिसत कम करिये, जब आपको उत्पादन बढ़कर मिले, तब अगली फसल में रासायनिक खाद और कम करिये, कुछ सालों में आपका रासायनिक खाद शून्य हो जायेगा.

मिर्ची पर रस चूसने वाले कीड़े अगर नुकसान पहुंचा रहे हैं  हैं तो इसकी पहचान बड़ी आसानी से की जा सकती है , जिस मिर्ची पर रस चूसने वाले कीड़े का अटैक नहीं होता उस मिर्ची के पत्ते प्लेन दिखते हैं,  जिस मिर्ची पर रस चूसने वाले कीड़े आ जाते हैं,  उस मिर्ची के पत्तों को देखने पर ऐसा लगता है,  की पत्तों का कुछ भाग मतलब दाने-दाने ऊपर आ गए हैं,  इसे इंग्लिश में ऑफसेट कहते हैं,  जब पत्ते दानेदार दिखने लगें,  समझिए किटक आ गए हैं, वायरस आनेवाला है.

आप उपरोक्त सिस्टम से अगर नियमित छिड़काव करते हैं, तब रस चूसनेवाले किटकों की सम्भावना कम से कम हो जाती है, जैसे ही आपको किटकों के आने की सम्भावना प्रतीत हो, तुरंत मल्टीप्लायर तथा ऑल क्लियर के घोल में रासायनिक दवाई मिलाकर छिड़काव करें.

मल्टीप्लायर का जादू.
        किसी भी फसल को जब आवश्यक भोजन नहीं मिल पाता,  वह कमज़ोर हो जाती है,  फसल कमज़ोर होने के बाद ही उसपर कीड़ और रोग का अटैक होता है,  मल्टीप्लायर फसल को उसकी आवश्यकता से अधिक भोजन की उपलब्धता कराता है,  इसीलिए मल्टीप्लायर  की मदद से उत्पादित की जानेवाली मिर्ची पर कीड़ और रोग का अटैक नहीं होता, अगर होता है तब कम से कम होता है.

एक और महत्वपूर्ण बात आपको याद रखनी है, कि जब भी कभी आकाश में बादल ज़्यादा हों,  तथा सूर्यप्रकाश पृथ्वी पर कम आ रहा हो,  ऐसे समय आप को  मिर्ची की फसल का विशेष ध्यान रखना पड़ेगा,  ऐसे समय में ऑल क्लियर के साथ रस चूसनेवाले किटक की दवा के साथ में, मल्टीप्लायर मिलाकर छिड़काव करना है.  ऐसा करने से आपकी मिर्ची कीड़ और रोग से अपने आप को बचाने में सक्षम बनेगी.

शिमला मिर्ची तथा मिर्ची की फसल में आपको ट्रायकोडर्मा ट्रीटमेंट करना जरुरी है, ५ एकड़ में ट्रायकोडर्मा ट्रीटमेंट का खर्च २५० रुपये आता है, कंपनी के बताए अनुसार ट्रायकोडर्मा घर पर बनाकर जब फसल को पानी देंगे तब पानी के साथ देना है, ऐसा तीन महीने तक लगातार करें, ऐसा करने से मिटटी से सभी हानिकारक विषाणु समाप्त हो जायेंगे.

टमाटर, मिर्च एवम शिमला मिर्च :

फूल और फल की वृद्धि के लिए
फूल आने के समय मल्टीप्लायर 20 ग्राम + आल क्लियर 3 मिली + कृष्णा स्प्रे प्लस 1 मिली + कैल्शियम नाइट्रेट 80 ग्राम + बोरॉन 20 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी के साथ 6 दिन के अंतर पर स्प्रे करें।


ग्रोथ के लिए :

पौध रोपण के 7 दिन बाद से
NPK  12:61:00@ 75 ग्राम + मल्टीप्लायर 20 ग्राम + आल क्लियर 3 मिली + कृष्णा स्प्रे प्लस 1 मिली प्रति 15 लीटर पानी के साथ 6 दिन के अंतर पर स्प्रे कीजिये।


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