खेतों में कम हो रही है नाइट्रोजन
भोपाल, जनवरी : किसी भी खेत की बेहतरी मृदा परीक्षण केंद्रों
से आ रहे नतीजों में एक चौंकाने वाली बात यह है कि खेतों की मिट्टी में नाइट्रोजन
जैसे अहम पोषक तत्व की मात्रा लगातार कम हो रही है।
कृषि विशेषज्ञों के
मुताबिक मिट्टी में ऑर्गेनिक कॉर्बन के कारण भी नाइट्रोजन कम हो रही है। किसानों
द्वारा खेतों में फसल अवशेष जलाए जाने के कारण भी नाइट्रोजन का स्तर कम हो रहा है।
नाइट्रोजन पौधों के गहरे हरे रंग के लिए उत्तरदायी होता है और उनमें प्रोटीन
बढ़ाने का काम करता है। अनाज के दानों में मजबूती भी नाइट्रोजन की बदौलत ही आती
है। अगर पौधों में नाइट्रोजन कम हो जाती है तो उसकी पत्तियां और फूल झड़ने शुरू हो
जाते हैं। फसल का जल्दी पकना और पौधों का सामान्य से छोटे कद का हो जाना भी
नाइट्रोजन की कमी के ही लक्षण हैं।
किसानों द्वारा लगातार रासायनिक
खाद का इस्तेमाल भी नाइट्रोजन की कमी की वजह बन रहा है। जैविक खाद का नियमित
इस्तेमाल और पादपीय अपघटन से खेतों में नाइट्रोजन बनती है। प्रदेश के रायसेन और
सिवनी जिलों के मृदा परीक्षण केंद्रों में हुई जांच में मिट्टी में नाइट्रोजन की
भारी कमी पाई गई है। इसका असर उत्पादकता पर भी देखने को मिल रहा है।
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