Tuesday, February 20, 2018

किन्नू की फसल का मल्टीप्लायर के साथ नियोजन ( Planning with Kinnu's crop multiplier)

मल्टीप्लायर : Kinnow किन्नू : किन्नू की फसल का मल्टीप्लायर के साथ नियोजन

   किन्नू के बगीचे में साल में १० महीने बगीचे में पानी दिया जाता है, हर महीने १ किलो मल्टीप्लायर जमीन से देना है, मल्टीप्लायर जमीन से देने का तरीका अलग से बताया गया है.

छिड़काव से फसल पर ज्यादा अच्छा और तुरंत परिणाम मिलता है, इसलिए जमीन से देने के साथ-साथ प्रति सप्ताह १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर + २ मिली ऑल क्लियर मिलाकर छिड़काव करें, इसमें आवश्यकतानुसार रासायनिक दवाइयां भी मिलाई जा सकती हैं.

रासायनिक खाद एकदम से बंद नहीं करना है, उसका प्रमाण २० प्रतिसत कम करिये, जब आपको उत्पादन बढ़कर मिले, तब अगली फसल में रासायनिक खाद और कम करिये, कुछ सालों में आपका रासायनिक खाद शून्य हो जायेगा.

मल्टीप्लायर के फायदे.
मल्टीप्लायर फसल को सभी प्रकार के अन्न द्रव्य प्राकृतिक रूप से उपलब्ध कराता है, इससे पहला फायदा यह होता है, कि किसान भाई को इन घटकों की पूर्तता के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च नहीं करना पड़ते, और दूसरा फायदा यह होता है कि प्राकृतिक तरीके से पोषण होने के कारण फसल को आवश्यकतानुरूप भोजन मिलता है, किसी भी घटक  की कमी या अधिकता नहीं होती.

मल्टीप्लायर फसल से सम्बंधित अनेक समस्याओं को तुरंत नियंत्रित करता है, फसल के पत्तों का आकार बढ़ाता है, कलर डार्क ग्रीन बनाता है, पत्तों की संख्या बढ़ाता है, इसलिए फसल सूर्यप्रकाश की मदत से अधिक भोजन बनाने में सक्षम हो जाती है, जितना भोजन बनेगा उतना ही उत्पादन मिलेगा.

मल्टीप्लायर के इस्तेमाल से पत्तों का आकार डेढ़ गुना तक हो जाएगा, पत्तों का रंग डार्क ग्रीन होगास्ट्रॉंग फूल आएँगे एवं ज़्यादा से ज़्यादा मात्रा में फल में परिवर्तित होंगे, फलों को जंबो आकार एवं मनलुभावन रंग प्राप्त होगा, जिससे टनेज भी बढ़ेगा और बाजार में दाम भी ज़्यादा मिलेगा.

फल खेती से पैसे तभी मिलेंगे जब आपके फलों को जम्बो आकार मिलेगा, जम्बो आकार मिलने के लिए आपकी बाग को आवश्यकता के अनुरूप भोजन मिलना जरुरी है, मल्टीप्लायर बाग को आवश्यकता से अधिक भोजन देने में सक्षम होने के कारण फलों को जम्बो आकार मिलता है.


किन्नू के बगीचे में मर रोग की समस्या आती है, आपके बगीचे को इस समस्या से बचाने के लिए, ट्रायकोडर्मा ट्रीटमेंट करना जरुरी है, कंपनी द्वारा बताई गई तकनीक से घर पर ट्रायकोडर्मा बनाएं, साल में कम से कम ३ बार पानी के साथ दें, ५ एकड़ का खर्च २५० रुपये आता है.


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