Wednesday, February 14, 2018

जीवामृत खाद से करें जीरो बजट खेती ( Zoroastrian fertilization with zero budget farming)

जीवामृत खाद से करें जीरो बजट खेती

भोपालजनवरी :
              रासायनिक उर्वरक दो मोर्चों पर नुकसानदेह हैं एक तो ये किसानों की जेब में छेद करते हैं और दूसरा इनकी वजह से फल-सब्जियों में विषाक्तता का खतरा हमेशा रहता है। यही वजह है कि प्रदेश के कई किसान अब जीवामृत खाद की मदद से जीरो बजट खेती को अपना रहे हैं।
       जीवामृत खाद की मदद से जीरो बजट खेती करने वाले मंडला के किसान शुभम तिवारी कहते हैं कि उन्हें इसकी प्रेरणा किसानों को प्राकृतिक कृषि के लिए प्रेरित कर रहे महाराष्ट्र के कृषि विशेषज्ञ सुभाष पालेकर से प्राप्त हुई।


कैसे बनती है जीवामृत खाद?
       यह खाद देसी गाय के गोबर और गोमूत्र के माध्यम से बनती है। गोबर और गोमूत्र में गुड़ मिलाकर पहले इसमें बैक्टीरिया बढ़ाये जाते हैं। बाद में इसमें बेसन भी मिला दिया जाता है। इसे आपस में अच्छे से मिलाया जाता है। यह प्रक्रिया लगातार चार दिन तक दोहराई जाती है। बाद में इसे फिल्टर से छानकर टंकी में स्टोर कर लिया जाता है। एक एकड़ रकबे में करीब 200 लीटर जीवामृत लगती है। इसका प्रयोग एक माह में एक बार किया जाता है। यह केवल पौधों की बढ़वार के लिए जरूरी है बल्कि पत्तियों पर स्प्रे करने से कीट भी नहीं पनपते।


खाद बनाने के लिए औसतन 10 लीटर गोमूत्र, 10 किलो गोबर, एक किलो गुड़, एक किलो बेसन और 200 लीटर पानी मिलाया जाता है। इतनी खाद एक एकड़ के लिए पर्याप्त है।


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