Sunday, March 25, 2018

जीरो टिलेज यानी बिना जुताई की खेती(Zero Tillage i.e. cultivation of tiller)

जीरो टिलेज यानी बिना जुताई की खेती

भोपाल, अक्टूबर : मध्य प्रदेश के रीवा जिले के किसान इन दिनों जीरो टिलेज खेती की मदद से गेहूं की बुवाई कर रहे हैं। इस विधि से खेत की जुताई और बुवाई एक साथ हो जाती है इससे किसानों को प्रति हेक्टेयर 2000 से 3000 रुपये की बचत हो जाती है।

कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर में पदस्थ प्रमोद द्विवेदी कहते हैं कि गेहूं की खेती करने वाले किसान पहले ही अधिक लागत और कम उपज से परेशान हैं। उनके लिए यह विधि राहत की खबर लाई है। द्विवेदी के मुताबिक इस विधि से खेती करने में वक्त भी कम लगता है और उपज में भी 10 से 15 फीसदी का इजाफा हो जाता है। इस विधि से गेहूं के अलावा मक्का, ज्वार, बाजरा, चना मटर आदि तमाम फसलों की बुवाई भी की जा सकती है।

टिलेज मशीन जुताई करती जाती है और उसमें लगे उपकरण एक निश्चित दूरी पर खेतों में गड्ढे बनाते जाते हैं जिनमें बीज अपने आप गिरते जाते हैं। इस दूरी को किसान अपनी मर्जी से कम या ज्यादा कर सकते हैं।

हालांकि जीरो टिलेज कृषि के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है। पहली बात तो यह कि खेत समतल होने चाहिए। इससे पहले अगर धान की फसल लगी थी तो उसे जड़ से काटना चाहिए क्योंकि बड़े आकार के डंठल टिलेज में समस्या पैदा करते हैं। खरपतवार के नियंत्रण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। अगर नमी कम हो तो बुवाई के तत्काल बाद हल्का पानी दिया जाना चाहिए।

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