जैविक खाद व जैव उर्वरक
अपने खेतों का मिट्टी परीक्षण हर साल करवाना चाहिए। इससे मिट्टी के उपजाऊपन का पता चलता है जिससे खाद सही मात्रा व सही तरीके से प्रयोग होती है।
फसल के अच्छे विकास के लिए 20 टन/ एकड़ अच्छी तरह सड़ा गोबर या 4-5 टन/ एकड़ केंचुआ खाद डालें। खादों का भरपूर प्रयोग सुनिश्चित करने के लिए 1kg एज़ोटोबेक्टर व 1kg फॉस्फेट ग़ोलक जीवाणु प्रति एकड़ भी डालें। इन्हे 50kg गोबर में मिलाकर आखिरी जुताई से पहले खेत में बिखेरें।
गोबर के साथ कई तत्वों से भरपूर उत्पाद जैसे कि मल्टीप्लायर 4 किलो (प्रति माह 1 किलो) के हिसाब से डालें। यदि रैलीगोल्ड या फार्मग्रो ना मिले तों 500kg जैविक खाद/ एकड़ या 3kg फोस्फ़ोबैक्टीरिया/ एकड़ डालें।
रासायनिक खाद
बीज के लिए बीजी फसल के लिए 150 kg डी. ए.पी, 100kg एस एस पी, 100kg एम. ओ. पी(पोटाश) और 30kg अमोनियम सल्फेट प्रति एकड़ डाले।
प्रोसेसिंग के लिए बीजी फसल के लिए 100kg डी. ए.पी, 150kg एस. एस. पी, 50kgएम. ओ. पी (पोटाश) एवं 50kg अमोनियम सल्फेट/ एकड़ डाले।
सूक्ष्म तत्वों की पूर्ति के लिए बुवाई से पहले 8kg ज़िंक सल्फेट 8kg मैंगनीज़, 4kg फेरस सल्फेट, 400gm अमोनियम मोलिब्डेट, 400gm सोडियम बोरेट/ एकड़ डालें।
मिट्टी चड़ाई पर उर्वरक की आपूर्ति
बुवाई के 20-25 दिन बाद या जब पौधे 10-15cm तक हो तो मिट्टी चढ़ाने के समय 50kg यूरिया, 15kg मेग्नीशियम सल्फेट वा 7kg केल्शियम नाइट्रेट/ एकड़ डाले।
आलू में दरारें पड़ना वा फटना रोकने हेतु, 4-6 क्विंटल जिप्सम प्रति एकड़ खालीयाँ में डाले या 250gm ईडीटीए कैलशियम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें। पत्तों पर जिप्सम ना गिरने दें।
ज़रूरी बात- उर्वरकों पर होने वाले फालतू खर्चे को कम करें। बुवाई से पहले अपने खेत की मिट्टी परख अवश्य करवाएँ।
फेर्टीगेशन
ड्रिप विधि अपनाएं 20% तक उर्वरक बचाएं।
ड्रिप विधि द्वारा बिजाई के पहले महीने 24.50 kg यूरिया, 6.6kg मोनो अमोनियम फोसफेट, 6.7 kg पोटाश (सफ़ेद)/ एकड़ शुरुआती अवस्था में हर चौथे दिन 7 बराबर किश्तों मे दें। पहली किश्त आलू अंकुरण पर दें। शेष 25kg यूरिया, 26.2kg मोनो अमोनियम फोसफट 26.7 kg पोटाश (सफ़ेद)/ एकड़ की मात्रा हर चौथे दिन 13 बराबर किश्तों मे दें।
घुलनशील खाद का प्रयोग
पानी में घुलनशील खादों का प्रयोग
आलू की अच्छी भराई से 20-25% अधिक मूल्य प्राप्त करने हेतु वाई के 50-55 दिन बाद 2kg NPK13:0:45 (पोटाशियम नाइट्रेट) व 100gm मेग्निशियम EDTA 250-300Ltr पानी के साथ प्रति एकड़ में छिड़कने से उपज में वृद्धि होती है। इसके साथ पछेती झुलसा रोग रोकने हेतु फफूंदीनाशक भी मिला सकते हैं।
पुटाई के 20-25 दिन पहले NPK 0:0:50 (सल्फेट ऑफ पोटाश) 2kg/एकड़/250Ltr पानी (75gm/15Ltr पानी) छिड़कने से आलू की भराई में वृद्धि होती है।
पछेती बिजाई के आलू की प्रोसेसिंग किस्म की एक समान भराई हेतु 2 किलो 0-52-34 और 100 ग्राम मैगनीशियम (ईडीटीए) प्रति एकड़ छिड़कें।
पोषक तत्वों की कमी के लक्षण व नियंत्रण
नाइट्रोजन: पौधो का विकास रुक जाता है, पौधे बौने रह जाते हैं। पहले पुरानी पत्तियाँ पीली पड़ती हैं, बाद में सारा पौधा पीला पड़ जाता है। इसे रोकने हेतु खाद की अनुमोदित मात्रा डालें। लक्षण दिखने पर 2% यूरिया (1kg/50Ltr पानी) के हफ्ते के अंतर अपर 2-3 छिड़काव करें।
फोस्फोरस: धीमा विकास, केवल कुछ टहनियाँ ही निकलती है। पत्तों के किनारे झुलसे हुए लगते हैं, पुराने पत्ते झड़ जाते हैं। पत्तों में बैंगनी रंग दिखाई पड़ता है। रोक के लिए खाद की अनुमोदित मात्रा डालें। लक्षण दिखने पर NPK 12:61:0 के 75gm+ मल्टीप्लायर 20 ग्राम/15Ltr पानी की दर से हफ्ते के अंतर पर 2-3 छिड़काव करें।
पोटाश: पौधा छोटा, झाड़ीनुमा रह जाता है। पत्तों की शिराओं के बीच पीलापन, किनारे झुलसे हुए व पत्तों की निचली सतह पर भूरे रंग के दाग। रोक हेतु खाद की अनुमोदित मात्रा प्रयोग करें। लक्षण दिखने पर NPK 13:0:45 के 75gm+ मल्टीप्लायर 20 ग्राम/15Ltr पानी की दर से हफ्ते के अंतर पर 2-3 छिड़काव करें।
केल्शियम: पौधों का विकास कम रहता है, पौधा थोड़ा झाड़ीनुमा लगता है। नई पत्तियाँ चोटी, हल्की पीली, ऊपर की ओर मुड़ी हुई, किनारे सूखे हुए। जो आलू बनते हैं उनका आकार छोटा रेहता है। कमी दिखने पर केल्शियम नाइट्रेट 1gm/Ltr पानी का छिड़काव करें।
मेंगनीज: पत्तों की शिराओं के साथ साथ काले/भूरे धब्बे। ये धब्बे पत्ते की निचली सतह पर ज़्यादा साफ दिखते हैं। लक्षण दिखने पर 1% मेंगनीज सल्फेट (1kg/100Ltr पानी) का छिड़काव करें।
लोहा: इसकी कमी से पत्तियों की शिराओं के बीच का भाग हल्का हरा या सफ़ेद हो जाता है लेकिन शिराएँ हरी ही रहती हैं। अधिक कमी होने पर सारा पत्ता हल्का पीला या सफ़ेद हो जाता है। लक्षण नई पत्तियों पर दिखते हैं। 1% फेरस सल्फेट (1kg/100Ltr पानी) का छिड़काव करें।
बोरॉन: नई बढ़ती कलियाँ सूख जाती हैं, पौधा बौना रह जाता है। तना छोटा रह जाता है। पत्ते मोटे व ऊपर की ओर मुड़े हुए। आलू पर मृत धब्बे नज़र आते हैं। रोक हेतु सोडियम बोरेट या सोल्यूबोर 1gm/Ltr पानी छिड़कें।
ग्रोथ रेगुलेटर
बुवाई के 50-55 दिन पर कलोरमेकाट क्लोराइड (लिहोसिन/साइकोसिल) 100ml+मल्टीप्लायर 270 ग्राम+ आल क्लियर 40 मिली + कृष्णा स्प्रे प्लस 15 मिली /200Ltr पानी/एकड़ छिड़कने से वानस्पतिक वृद्धि कम हो जाती है जिससे विकसित हो रहे आलुओं का वजन बढ़ता है व उनकी भराई अच्छी होती है।
फसल मे सिंचाई की उपलब्धता की कमी होने स्थिति पर आलू की भराई (बुवाई के 70-90 दिन के बीच) थायोयूरिया@100ग्राम + मल्टीप्लायर 20 ग्राम +आल क्लियर 2 मिली प्रति एकड़ 150Ltr पानी का छिड़काव उत्पादन बढ़ा ने मे सहायक होता हे।
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