Saturday, November 18, 2017

आलू की उन्नत फसल के लिए कीट प्रबंधन (Pest Management for Potato Advanced Crops)



माहुं

माहु- छोटे आकार के पीले से हरे रंग के होते है।यह पत्तों का रस चूस्ते है।जयादा गिनती में होने से पत्ते पीले व सूख जाते हैं। जब इनकी संख्या बड़ जाए तो यह भारी तक नुकसान करते है।

हर दूसरे दिन खेत में माहू की गिनती बेतरतीबी से Z -आकार चलते हुए पत्तों के नीचे देखते हुए करें।।अगर 20 माहू/ 100 पत्ते दिखें दिखें तों इसकी रोकथाम हेतु छिडकाव से करें।
रोकथाम- रोकथाम हेतु 40ml इमिडाक्लोप्रिड 200SL (कोन्फ़िडोर/ टाटा मिडा) या 40gm थायामेथोक्साम 25WG (एकटारा/ एक्साम) या 12gm क्लोथियानडिन 50WG (धनटोप) या 160ml स्पाइरोमेसीफेन (ओबेरॉन) या 80ml थायक्लोप्रिड (अलांटो)(मल्टीप्लायर 200 ग्राम+ आल क्लियर 30 मिली + कृष्णा स्प्रे प्लस 10 मिली)/ एकड़ 150Ltr पानी के साथ छिड़के।

सफ़ेद मक्खी

सफेद मक्खी अक्तूबर-नवंबर माह में सक्रिय होती है। बालिग सफेद पंखों वाले छोटे आकार के कीट होते हैं व बच्चे पत्तों के निचली सतह पर चिपके रहते हैं।
रोकथाम- रोकथाम हेतु 40ml इमिडाक्लोप्रिड 200SL (कोन्फ़िडोर) या 40gm थायामेथोक्सम 25WG (एकटारा/ एक्साम) या 12gm क्लोथियानिडिन 50WG (धनटोप) या 160ml स्पाइरोमेसीफेन (ओबेरॉन) या 80ml थायाक्लोप्रिड (अलांटो)(मल्टीप्लायर 200 ग्राम+ आल क्लियर 30 मिली + कृष्णा स्प्रे प्लस 10 मिली)/ एकड़ 150Ltr पानी के साथ छिड़के।

जैसिड या हरा तेला

जैसिड या हरा तेला- बालिग कीड़ा गर्मियों में पीले हरे और सर्दियों में लाल भूरे रंग का होता है। इसका शरीर लंबूतरा होता है।यह कीट अक्तूबर-नवंबर महीने में बहुत सक्रिय रहिता है। बालिग और बच्चे दोनो पत्तों का रस चूसते हैं।

लक्ष्ण-शुरूआत में पत्ते किनारों से पीले पड़ जाते हैं और बाद में भूरे धब्बे पड़ जाते हैं, पत्ते बड़े आकार के हो कर ऊपर की ओर मुड़ जाते हैं।

रोकथाम हेतु 40ml इमिडाक्लोप्रिड 200SL (कोन्फ़िडोर) या 40gm थायामेथोक्साम 25WG (एकटारा/एक्साम) या 12gm क्लोथियानडिन 50WG ( धनटोप ) या 160ml स्पाइरोमेसीफेन (ओबेरॉन) या 80ml थायक्लोप्रिड (अलांटो) (मल्टीप्लायर 200 ग्राम+ आल क्लियर 30 मिली + कृष्णा स्प्रे प्लस 10 मिली)/ एकड़ 150Ltr पानी के साथ छिड़के।

कुतरा सुन्डी

कुतरा सुन्डी- सूँडी धरती के स्तर पर छोटे पौधे को काट कर भारी तक नुकसान करती है। यह एक लाइन या सीधी चलकर अगले पौधे पर हमला करती है।
जांच- रोगी पौधे यां उसी कतार के अगले पौधे को उखाड़ कर प्रकोप जाँचे। यदि प्रकोप कम हो तो उन्हे नष्ट कर दें। यदि प्रकोप अधिक हो तो बिजाई के वक्त 3kg फोरेट/ एकड़ डालें या 2Ltr क्लोरोपायरीफोस (डरसबान/ रडार) / एकड़ से कतारों को उपचारें।

(वाइरस) पत्ता मरोड़ विषाणु

पत्ता मरोड़ विषाणु
लक्ष्ण- छोटी पत्तियों के किनारे पीले होके ऊपर की ओर मुड़ जाती हैं। मुड़े हुए पत्ते आम पत्तों की अपेक्षा ज़्यादा मोटे होते हैं और उन पर थोड़ी सी बैंगनी रंग की आभा होती है।

बात पते की! पत्ता मरोड़ विषाणु रोग अगर चेपे से फैला हो तो ऊपर वाले पत्ते ऊपर की ओर मुड़ जाते हैं। पत्ता मरोड़ विषाणु रोग अगर कंदों से फैला हो तो नीचे वाले पत्ते ऊपर की ओर मुड़ जाते हैं।

रोकथाम-
1.पत्ता मरोड़ विषाणु रोग का कोई इलाज नही है, फैलन से रोकने हेतु, बीमार पौधे उखाड़ दें और रस चूसक कीट की   रोकथाम करो।
2. रस चूसक कीटों की रोकथाम हेतु 4रोकथाम हेतु 40ml इमिडाक्लोप्रिड 200SL (कोन्फ़िडोर) या 40gm थायामेथोक्साम 25WG (एकटारा/एक्साम) या 12gm क्लोथियानडिन 50WG ( धनटोप ) या 160ml स्पाइरोमेसीफेन (ओबेरॉन) या 80ml थायक्लोप्रिड (अलांटो)+ (मल्टीप्लायर 20 ग्राम+ आल क्लियर  3 मिली+ कृष्णा स्प्रे प्लस)/ एकड़ 150Ltr पानी के साथ छिड़के।
3. विषाणु (वाइरस) मुक्त बीज ही प्रयोग करें।

पत्ती खाने वाले कीट

पत्ती खाने वाले कीट या तो सूँडीयां या फिर छोटे भृंग होते हैं। सामान्य लक्षण है खाई हुई पत्तियाँ, पत्ती में छेद, पत्ती की शिराओं का जाला। ऐसे लक्षण दिखे तो क्वीनाल्फ़ोस (एकालक्स/ धानूलक्स/ क्विंगार्ड) या ट्राइजोफॉस (होस्टाथिओन/ टारजन/ घातक) या इंडोक्साकार्ब (अवांट/ दक्ष) या डाइक्लोरवोस (नुवान/ डूम) 30ml +मल्टीप्लायर 20 ग्राम/15Ltr पानी की दर से छिड़कें।

सफ़ेद लट्ट (कुरमुला)

सफ़ेद लट (कुरमुला) आलू व अन्य कई फसलों को हानी पहुँचाने वाला भयंकर कीट है। ये मिट्टी में रहकर जड़ो व बनते आलूओं को खाता है। अधिक प्रकोप होने पर 80% तक नुकसान हो सकता है। ये एक सफ़ेद रंग की सूँडी होती है जिसका मुंह पीला व पिछला हिस्सा काला होता है। छूने पर ये 'C' आकार धारण आकर लेता है। इसकी रोक हेतु
1. खेत में कच्चा गोबर ना डालें।
2. खेत तैयार करते समय 1-2 गहरी जुटाई करके इन्हे बाहर निकालें ताकि पक्षी इन्हे खा जाए।
3. खेत तैयार करते समय व मिट्टी चढ़ाते समय 5kg फोरेट (थिमेट) या 6kg फिप्रोनील (रीजेंट/टास्क) प्रति एकड़ डालें।
4. नुकसान दिखाई देने पर पौधो को जड़ों को क्लोरपायरीफॉस 20ईसी (डरमेट /लिथल / फोर्स) 40ml/15Ltr पानी के घोल से भिगोएँ।

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