गेंहूँ फसल :
कण्डूआ रोग की रोकथाम के लिए कार्बेन्डाजिम अथवा थीरम 2.5 ग्रा./ किग्रा. बीज की दर से बीजोपचार करें।गेंहूँ की समय से बुआई के लिए नवम्बर माह उपयूक्त समय हैगेंहूँ बुआई के 21 दिन बाद पहली सिंचाई करें। गेंहूँ में 120:50:40 NPK की दर से उर्वरक डालें। बुवाई के समय नाईट्रोजन की आधी तथा फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा आधार खुराक के रूप में उालें।
सब्जियां :
टमाटर तथा फूलगोभी की पछेती किस्मों की रोपाई करें।रोपाई से पहले खेत में 20-25 टन प्रति हैक्टेअर की दर से गोबर की खाद व 120:100:60 किग्रा नाईट्रोजन फास्फोरस पोटाश प्रति हैक्टेयर भूमि में डालें।
गाजर, शलजम व मूली की बुवाई करें। प्याज की नर्सरी तैयार करें । प्याज की उन्नत किस्में पूसा रेड, पूसा माधवी, पूसा रिद्धी किस्मों की नर्सरी में बुआई करे।पालक में यदि सफेद रतुआ के लक्षण दिखाई दें तों मै्रकोजेब या रिडोमिल एमजैड 72 दवा का 2.5 ग्रा./लिटर पानी में घोल बनाकर छिडाव करें।
फल फसलें:
आम के पौधों मे जहां गो्ंद निकलने के लक्षण दिखें उन्हे खूरच कर साफ करे तथा घाव पर वबोरडेक्स दवा का लेप कर दें।फलों के पेड पर यदि शाखाओं पर शीर्षरंभी क्षय बीमारी के लक्ष्ण दिखाई दें तो उन शाखाओं को काटकर 0.3 प्रतिशत कॉपर ऑक्सीक्लोराईड के घोल का 15 दिन के अन्तराल पर छिडकाव करें।पपीते, मौसम्मी , ग्रेप तथा चकोतरे की तुडाई करें।दलहनी फसलेंमध्य अक्टूबर से नवम्बर के पहले सप्ताह तक चने की बुवाई कर दें। छोटे दाने वाली किस्मों के लिए बीज दर 80 किग्राम/है. तथा मोटे दानों वाली किस्मों के लिए 100 किग्रा/ हैक्टेयर की दर से बुआई करे।दलहन की बुवाई के 45 तथा 75 दिन बाद 2 सिचाई करें।
बुआई के समय नाईट्रोजन फास्फोरस गंधक जिंक की 20:50:20:25 किग्रा /है. की मात्रा आधार खुराक के रूप में डाले।
नवम्बर के दूसरे सप्ताह तक मटर की बुआई कर दें। मटर की किस्मे पूसा प्रभात, पूसा प्रगति व पूसा पन्ना की बुआई करें।
कण्डूआ रोग की रोकथाम के लिए कार्बेन्डाजिम अथवा थीरम 2.5 ग्रा./ किग्रा. बीज की दर से बीजोपचार करें।गेंहूँ की समय से बुआई के लिए नवम्बर माह उपयूक्त समय हैगेंहूँ बुआई के 21 दिन बाद पहली सिंचाई करें। गेंहूँ में 120:50:40 NPK की दर से उर्वरक डालें। बुवाई के समय नाईट्रोजन की आधी तथा फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा आधार खुराक के रूप में उालें।
सब्जियां :
टमाटर तथा फूलगोभी की पछेती किस्मों की रोपाई करें।रोपाई से पहले खेत में 20-25 टन प्रति हैक्टेअर की दर से गोबर की खाद व 120:100:60 किग्रा नाईट्रोजन फास्फोरस पोटाश प्रति हैक्टेयर भूमि में डालें।
गाजर, शलजम व मूली की बुवाई करें। प्याज की नर्सरी तैयार करें । प्याज की उन्नत किस्में पूसा रेड, पूसा माधवी, पूसा रिद्धी किस्मों की नर्सरी में बुआई करे।पालक में यदि सफेद रतुआ के लक्षण दिखाई दें तों मै्रकोजेब या रिडोमिल एमजैड 72 दवा का 2.5 ग्रा./लिटर पानी में घोल बनाकर छिडाव करें।
फल फसलें:
आम के पौधों मे जहां गो्ंद निकलने के लक्षण दिखें उन्हे खूरच कर साफ करे तथा घाव पर वबोरडेक्स दवा का लेप कर दें।फलों के पेड पर यदि शाखाओं पर शीर्षरंभी क्षय बीमारी के लक्ष्ण दिखाई दें तो उन शाखाओं को काटकर 0.3 प्रतिशत कॉपर ऑक्सीक्लोराईड के घोल का 15 दिन के अन्तराल पर छिडकाव करें।पपीते, मौसम्मी , ग्रेप तथा चकोतरे की तुडाई करें।दलहनी फसलेंमध्य अक्टूबर से नवम्बर के पहले सप्ताह तक चने की बुवाई कर दें। छोटे दाने वाली किस्मों के लिए बीज दर 80 किग्राम/है. तथा मोटे दानों वाली किस्मों के लिए 100 किग्रा/ हैक्टेयर की दर से बुआई करे।दलहन की बुवाई के 45 तथा 75 दिन बाद 2 सिचाई करें।
बुआई के समय नाईट्रोजन फास्फोरस गंधक जिंक की 20:50:20:25 किग्रा /है. की मात्रा आधार खुराक के रूप में डाले।
नवम्बर के दूसरे सप्ताह तक मटर की बुआई कर दें। मटर की किस्मे पूसा प्रभात, पूसा प्रगति व पूसा पन्ना की बुआई करें।
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