गेंदा लगायें बहार लायें
भूमि एवं भूमि की तैयारी:-
जलनिकास युक्त बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम होती
है। भूमि की तैयारी के लिये भूमि को अच्छी तरह 3-4 जुताई करके
पाटे की सहायता से समतल एवं भुरभुरी बना लेना चाहिये।
अफ्रीकन गेंदा:- इस प्रजाति के पौधे ऊंचे होते
हैं जो लगभग 2 मी. तक लंबे होते हैं। इनके फूल आकार में बड़े
एवं अनेक रंगो के होते है।
प्रमुख किस्में:- क्रेकर जैक, क्लाइमेक्स,
ग़ोल्डन
एज़, क्राउन ऑफ गोल्ड, अफ्रीकन जायंट, डबल नारंगी,
अफ्रीकन
जायंट डबल पीला, पूसा नारंगी, गोल्डन जुबली,
अलास्का,
फस्र्ट
लेडी, गोल्ड लेडी, ऑरेंज लेडी आदि।
फ्रेंच गेंदा:- इस प्रजाति के पौधे बौने होते
हैं जो लगभग 20-40 से.मी. तक लंबे होते हैं। इनके फूल आकार में
छोटे एवं अनेक रंगों के होते है।
प्रमुख किस्में:- सनराईज, पूसा
बसंती, रस्टी रेड, जिप्सी, रेड हेड,
बटर
स्कॉच, फायरग्लो, वेलेन्सिया, रेड ब्रोकेड,
टेंजेरिन
आदि।
नर्सरी बुवाई एवं रोपाई:- गेंदे की नर्सरी के
लिये भूमि से 15-20 से.मी. ऊॅंची क्यारियॉं तैयार करनी चाहिये।
क्यारियों का आकार 3&1 मी. रखना चाहिये। बीज बुवाई से पहले
क्यारियों को 0.2 प्रतिशत बाविस्टीन से उपचारित करें ताकि पौध
मे फफूंदजनित रोग ना लगे। भूमि को 30 से.मी. गहराई तक खोदकर भुरभुरा एवं
समतल बना लें एवं सड़ी गोबर खाद फैलाकर मिट्टी में मिला दें। बीजों को कतारों मे
बोकर ऊपर से खाद एवं मिट्टी के मिश्रण से बीजों को ढंककर फव्वारे से हल्की सिंचाई
कर दें।
बीज दर:- सामान्य किस्मों में 1-1.5
कि.ग्रा. एवं संकर किस्मों में 700-800 ग्राम बीज/हेक्टेयर के लिये पर्याप्त
होता है।
पौध रोपण एवं दूरी:- जब पौधा 10-15
से.मी. एवं 3-4 पत्तियों का हो जाये तब मुख्य खेत में शाम के
समय पौधे का रोपाई करना चाहिये। सामान्यत: 25-30 दिन में पौधा
रोपाई के लायक हो जाता है। रोपाई के बाद जड़ों के चारो तरफ की मिट्टी को दबा दें
एवं हल्की सिंचाई कर दें।
अफ्रीकन गेंदा को 45&45
से.मी. एवं फ्रेंच गेंदे को 25&25 से.मी. पौधे से पौधे एवं कतार से कतार
की दूरी पर रोपाई करना चाहिये। एक हेक्टेयर मे रोपाई करने के लिये अफ्रीकन गेंदें
मे 50000-60000 एवं फें्रच गेंदे मे 1.5-2.0
लाख पौधे की आवश्यकता होती है।
खाद एवं उर्वरक:-
गेंदा ( झेंडू ) के फूल की खेती मल्टीप्लायर के
साथ.
पौधे खेत में लगाते समय २०० लीटर पानी में २००
ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर प्रत्येक पौधे के रूट झोन में १०० मिली घोल डालना है.
गेंदे के फूल की खेती में जब तक पौधे पर फूल
नहीं लग जाते, तब तक प्रत्येक आठ दिन के अंतर से १५ लीटर के
पंप में १५ ग्राम मल्टीप्लायर + २ मिली ऑल क्लियर मिलाकर छिड़काव करना है, फूल
खिलने लगने के बाद आप तुरंत मल्टीप्लायर का छिड़काव बंद करे, अन्यथा
फूलों पर दाग आने की सम्भावना रहती है.
फसल लगाने से लेकर उत्पादन मिलता रहे तब तक हर
महीना १ किलो मल्टीप्लायर जमीन से देना है, मल्टीप्लायर
देने का तरीका अलग से बताया गया है.
रासायनिक खाद एकदम से बंद नहीं करना है,
उसका
प्रमाण २० प्रतिसत कम करिये, जब आपको उत्पादन बढ़कर मिले, तब
अगली फसल में रासायनिक खाद और कम करिये, कुछ सालों में आपका रासायनिक खाद शून्य
हो जायेगा.
गेंदे की खेती में मर रोग का प्रॉब्लेम आता है,
अचानक
पौधे मरने लगते है, जिस खेत की मिटटी
ज्यादा कड़क होगी वहां मर रोग आने की सम्भावना ज्यादा रहती है, मर
रोग से फसल को बचाने के लिए ट्रायकोडर्मा
के जीवाणु एक बार खरीदकर लाना है, जीवाणु स्वयं डेवलप करके आप हजारों
रुपये बचा सकते है, इसकी पूरी विधि कंपनी ने बताई है, उसका
प्रयोग करें, आप २५० रुपये खर्च करके ५ एकड़ खेती से समस्या
दूर कर सकते हैं.
मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करने से फसल को पूरा
पोषण मिलता है, इसलिए फूल ज्यादा संख्या में आते है तथा जल्दी
ख़राब नहीं होते, पौधों को समुचित पोषण मिलने से उनकी ऊंचाई तथा
शाखाओं की संख्या बढती है, फूल बड़े आकार के, पुरे
खिले हुए तथा ज्यादा संख्या में आते हैं.
भूमि की अंतिम जुताई के समय 15-20 टन
अच्छी सड़ी हुई गोबर खाद या कंपोस्ट खाद भूमि में मिला दें। 6
बोरी यूरिया, 10 बोरी सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं 3
बोरी म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति हेक्टेयर पर्याप्त रहता है। यूरिया
को तीन बराबर भागों मे बांटकर एक भाग एवं सिंगल सुपर फॉस्फेट व पोटाश की संपूर्ण
मात्रा को रोपाई के समय दें तथा यूरिया की दूसरी व तीसरी मात्रा को रोपाई के 30
दिन एवं 45 दिन बाद पौधो के आसपास कतारों के बीच में दें।
सिंचाई:- सामान्यत: 10-15 दिन के अंतराल
पर सिंचाई करते रहना चाहिये। आवश्यकता से अधिक पानी देने से फसल को नुकसान होता
है। यदि वर्षा के कारण खेत में पानी भर जाये तो जल निकास की व्यवस्था करनी चाहिये।
निंदाई-गुड़ाई:- गेंदे की खेती मे कम से कम दो
निंदाई-गुड़ाई करनी चाहिये। पहली गुड़ाई पौध रोपाई के 25 एवं दूसरी 45
दिन बाद करनी चाहिये।
शीर्ष कर्तन:- पौधों में अधिक शाखाएं एवं फूल
प्राप्त करने के लिये पौध की बढ़वार स्थिति में पौध रोपाई के 40
दिन बाद आवश्यक कृषि क्रियाओं में शीर्ष कलिका को तोडऩा चाहिये।
फूलों की तुड़ाई एवं पैकिंग:- फूलों की तुड़ाई
सुबह या शाम के समय ही करनी चाहिये। ऐसे फूल जो पूरी तरह खिले हो उनको हाथ या
कैंची की सहायता से तोडऩा चाहिये।
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