इन सभी बातों को जानना जरुरी है,
जिससे
कम खर्च में अधिक पैदावार हो सके मृदा में विभिन्न सूक्ष्म पोषक तत्वों
का स्तर :-
पौधों की उचित बढवार एवं विकास के लिए पोषक
तत्वों की आवश्यकता होती है | सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से पौधों
की वृद्धि, कार्यिकी एवं जनन क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता
है | भारतीय मृदाओं में पोषक तत्वों का स्तर की जानकारी किसान समाधान लेकर
आया है |
भारत में 2.52 लाख मृदा
नमूनों के अध्ययन से सिद्ध हुआ है कि भारत में सर्वाधिक जस्ते की कमी है | इन
नमूनों में से 49, 12, 4, 3, 33 एवं 41 प्रतिशत नमूनों
में क्रमश: जस्ता, लोहा, मैगनीज, तांबा, बोरोन,
एवं
गंधक आदि सूक्ष्म तत्वों की कमी है |
भारत में जस्ते की कमी तराई क्षेत्रों, उत्तर
प्रदेश एवं पंजाब की रेतीली मृदा में सर्वप्रथम 1965 में दिखाई डी
थी | इस लिए किसानों की सहायता के लिए किसान समाधान तालिका के रूप में
पूरी जानकारी लेकर आया है |
भारत की मृदाओं में विभिन्न सूक्ष्म पोषक
तत्त्वों का स्तर ;-
सूक्ष्म पोषक तत्व : उपलब्ध मात्रा (मि.ग्रा. /
कि.ग्रा. मृदा) सीमा -
औसत
जस्ता : 0.2 – 6 : 90.9
तांबा : 0.1 – 8 : 2 2.1
लोहा : 0.8 – 196 : 19.0
मैंगनीज : 0.2 – 118 : 21.0
बोरान : 0.08 – 2.6 : –
मृदा में सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा को
प्रभावित करने वाले कारक :-
पैतृक पदार्थ :-
एसे पैतृक
पदार्थ से उत्पन्न मृदाएँ जिसमें सूक्ष्म पोषक तटों की कमी होती है |
सघन
फसल उत्पादन में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दिखाई देती है |
मृदा पी.एच.मान :- अम्लीय मृदाओं
में बोरान एवं मोलिब्डेनम की कमी होती है | इसी प्रकार अधिक
पी.एच.मान वाली मृदाओं में जस्ता, लोहा, मैंगनीज एवं
तांबा की कमी हो जाती है | अम्लीय मृदाओं में अधिक चूने का प्रयोग
करने से भी सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता कम हो जाती है । अधिक ऊपज वाली
किस्मों का प्रयोग :- अधिक उपज देने वाली किस्में मृदा से
अधिक मात्र में सूक्ष्म पोषक तत्वों का अवशोषण करती हैं | कुछ वर्षों
पश्चात इन फसलों वाली मृदा में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के लक्ष्ण दिखाई देने
लगते हैं |
असंतुलित पोषक तत्व प्रबंध :– एकल
पोषक तत्व वाले उर्वरक के लम्बे समय तक अनुप्रयोग से भी मृदा में सूक्ष्म पोषक
तत्वों की कमी हो जाती है |
मृदा परिस्थितियां :- जल
प्लावित मृदाओं में जस्ता एवं ताम्र की उपलब्धता कम हो जाती है तथा लोहा एवं
मैंगनीज की उपलब्धता बढ़ जाती है |
कार्बनिक पदार्थ :- कार्बनिक पदार्थ
मुख्य एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों का भण्डार गृह कहलाता है |
उचित कार्बनिक खादों के प्रयोग से मृदा में
सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता में वृद्धि होती है |
भारतीय मृदाओं में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी
का स्तर (प्रतिशत नमूने) :
राज्य
- जस्ता : तांबा : लोहा
: मैंगनीज : बोरोन :
आन्ध्र प्रदेश - 49 : 1: 3: 3 : 0
असम : 34 : 1 : 2 : 20 : 17
बिहार - 54 : 3 : 6 : 2 : 38
गुजरात- 24 ; 4: 8 : 4 : 2
हरियाणा - 61: 2 : 20 : 4 : 0
हिमाचल प्रदेश - 42 : 0 : 27 : 5 : -
जम्मू एवं कश्मीर - 12 –––
कर्नाटक - 73 : 5 : 35 : 17 : 32
केरल - 34 : 3 : 1 : 0 : –
मध्य प्रदेश - 44 : 1 : 7 : 1 : 22
महाराष्ट्र - 86 : 0 : 24 : 0 : –
मेघालय - 57 : 2 : 0 : 23 : –
उड़ीसा - 54 : - : 0 : 0 : 69 :
पाण्डिचेरी - 8 : 4 : 2 : 3 : –
पंजाब - 48 : 1 : 14 : 2 : 13
राजस्थान - 21 : – : – : – : –
तमिलनाडु
- 58 : 6 : 17 : 6 : 21
उत्तर प्रदेश - 46 : 1 : 6 : 3 : 24
पश्चिम बंगाल - 36 : 0 : 0 : 3 : 68
सम्पूर्ण भारत - 49 : 3 : 12 : 5 : 33
मृदा में सूक्ष्म पोषक तत्व प्रबंधन :-
विभिन्न उर्वरकों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की
मात्रा
स्रोत : पोषक तत्व : मात्रा (प्रतिशत)
जिंक
सल्फेट : जस्ता : 21.0
मैंगनीज सल्फेट : मैंगनीज :
30.5
अमोनियम मोलिब्डेड : मोलिब्डेनम
: 52.0
बोरेक्स : बोरोन : 10.5
सोल्यूबोर :
बोरोन : 19.0
कापर सल्फेट : तांबा : 24.0
फेरस सल्फेट : लोहा : 19.5
जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट : जस्ता : 33.0
जिंक फास्फेट
: जस्ता : 19.5
जिंक चिलेट (इडीटीए) : जस्ता : 12.0
आयरन चिलेट (इडीटीए) : लोहा : 12.0
जिंक केटेड यूरिया : जस्ता + नाइट्रोजन : 2.0
जिंक +43
नाइट्रोजन
बोरोनेटेड : बोरोन + फास्फोरस : 0.18
फास्फोरस : बोरोन + 16.0
No comments:
Post a Comment