गेहूँ के विपुल उत्पादन के लिए मुख्य आवश्यक बातें
मिट्टी की जांच के बाद उर्वरकों को प्रयोग
करें। संतुलित मात्रा में समय पर उर्वरक दें। उर्वरकों का सही प्लेसमेंट उत्पादन
बढ़ाने में एवं उर्वरक उपयोग क्षमता बढ़ाने में योगदान देता है। उर्वरको को बीज से 2-3
सेमी नीचे डाले। कार्बनिक एवं जैविक स्रोतों का भरपूर उपयोग करे जिससे मृदा
स्वास्थ्य एवं उत्पादकता बढ़ती है।बीजदर अनुशंसित मात्रा में उपयोग करे। क्षेत्र
विशेष के अनुसार शुद्ध, स्वस्थ्य, कीट एवं रोग
रोधी किस्मों का चयन करें। समय पर बोनी करे। बीज एवं खाद एक साथ मिलाकर बोनी न
करें। देर से बुवाई की अवस्था में संसाधन प्रबंधन तकनीक जैसे, जीरो
टिलेज का प्रयोग करें। यथासंभव बुवाई लाइनों में करें क्रासिंग न करें। पौध संख्या
अनुशंसा से ज्यादा न करें।
खरपतवार नियंत्रक उपाय समय पर करें।
खरपतवारनाशी दवाओं का इस्तेमाल करते समय ध्यान दे कि फसल में नीदाओं की सघनता एवं
नीदाओं के प्रकार के हिसाब से रसायन का चयन करें। खरपतवार नाशी दवा का उपयोग मृदा
में पर्याप्त नमी होने की दशा में सही मात्रा एवं घोल का इस्तेमाल करें।गेहूँ
में सिंचाई मिट्टी का प्रकार सिंचाई साधन, सिंचाई उपकरण को
ध्यान में रखकर क्रान्तिक अवस्थाओं पर सिंचाई देवे।कीट एवं रोग नियंत्रक उपाय समय
पर करें।गेहूँ फसल की कटाई उपरांत नरवई खेतों में न जलायें, नरवई जलाने से
खेतों की मृदा में उपलब्ध लाभदायक सूक्ष्म जीवाणुओं का ह्रास होता हैं नरवई की आग
से लोगों के घरों में भी आग लगती है। एवं जन व पशुधन हानि की भी संभावना रहती है।
गेहूँ की फसल कटाई उपरांत खेतों में समुचित नमी की दशा में रोटावेटर चलाने
से नरवई कटकर मिट्टी में मिल जाती है जो कि मृदा के लिए लाभदायक भी है।आज के समय
में रसायनों के असंयमित प्रयोग से खेती की उत्पादन लागत बढ़ रही है। आवश्यकता है कि
इस उत्पादन लागत को कम किया जाये। उत्पादन लागत को कम करने का सस्ता एवं प्रभावी
तरीका है समन्वित प्रबंधन उपायों को अपनाना।मौसम के परिवर्तन, ग्लोबल
वार्मिंग के कारण धरती के बढ़ते तापमान एवं अनिश्चितता के कारण दिन प्रतिदिन कीड़े एवं
बीमारियों की समस्या फसलों में बढ़ रही है। इनके प्रभावी प्रबंधन हेतु समन्वित
उपायों को अपनाना नितांत आवश्यक है।खेती में उत्पादन प्राप्त करने के लिये समय पर
कुशल प्रबंधन एवं सही निर्णय आवश्यक है कई बार किसान भाई खरपतवार नियंत्रक उपायों
को देर से अपनाते हैं जिसके कारण खरपतवार फसल की क्रांतिक अवस्था निकल जाती है एवं
खरपतवार के पौधे मजबूत हो जाते हैं फिर उनका नियंत्रण रसायनों से भी मुश्किल होता
है।
गेहूं की फसल का मल्टीप्लायर के साथ नियोजन.
बुवाई के पहले बीजों को मल्टीप्लायर से
बीजोपचारित करें, बीजोपचार करने का तरीका अलग से बताया गया है.
फसल की बुवाई करते समय १ किलो मल्टीप्लायर जमीन
से देना है, उसके १ महीने बाद १ किलो मल्टीप्लायर जमीन से
देना है. जमीन से मल्टीप्लायर देने का तरीका अलग से बताया गया है.
छिड़काव से फसल पर ज्यादा अच्छा और तुरंत परिणाम
मिलता है, इसलिए जमीन से देने के साथ-साथ प्रति सप्ताह १५ लीटर पानी में २०
ग्राम मल्टीप्लायर + २ मिली ऑल क्लियर मिलाकर छिड़काव करें, सिर्फ दो या चार
बार छिड़काव से जबरदस्त रिझल्ट मिलेगा.
रासायनिक खाद एकदम से बंद नहीं करना है,
उसका
प्रमाण २० प्रतिसत कम करिये, जब आपको उत्पादन बढ़कर मिले, तब
अगली फसल में रासायनिक खाद और कम करिये, कुछ सालों में आपका रासायनिक खाद शून्य
हो जायेगा.
फसल की ऊंचाई आपके पहले के सभी रेकार्ड ब्रेक
कर देगी, गेहूं में ज्यादा मात्रा में फुटवे आएंगे, मतलब एक गेहूं
के बीज से ज्यादा संख्या में पौधे निकालेंगे
तथा उसके पत्तों का आकार देखनेवाले को आश्चर्यचकित कर देगा, जैसा
पत्तों का आकार रहेगा, वैसी ही जबरदस्त बाली ( लोम ) आएगी, गेहू की बाली में ४० से ५० दाने आते है,
मल्टीप्लायर
के नियमित नियोजन के बाद एक बाली में ८० के लगभग या उससे ज्यादा दाने आते है.
मल्टीप्लायर फसल से सम्बंधित अनेक समस्याओं को
तुरंत नियंत्रित करता है, फसल के पत्तों का आकार बढ़ाता है,
कलर
डार्क ग्रीन बनाता है, पत्तों की संख्या बढ़ाता है, इसलिए
फसल सूर्यप्रकाश की मदत से अधिक भोजन बनाने में सक्षम हो जाती है, जितना
भोजन बनेगा उतना ही उत्पादन मिलेगा.
मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करने के कारण फसल को
बढ़ाने के लिए, पत्तों को गहरे हरे रंग का बनाने के लिए,
दूसरे
किसी उत्पादन की आवश्यकता नहीं पड़ती.
आर्गेनिक आनाज को मार्किट में बहोत डिमांड है,
आप
इस आनाज को बाजार भाव से ज्यादा कीमत पर आसानी से सीधे ग्राहकों को बेच सकते है,
ऐसा
करने पर आनाज को मंडी तक ले जाने का खर्च बचेगा तथा दलाली का पैसा भी बचेगा.
आर्गेनिक उत्पादन का स्वाद अप्रतिम होता है,
जो
एक बार खा ले, बार-बार खाने को जी चाहे, इस
उत्पादन की ग्राहकों को आदत लग जाएगी, आप आपकी कीमत पर उत्पादन बेच सकेंगे.
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