अधिक उत्पादन हेतु सब्जियों की रोपाई से पूर्व क्या करें ?
यदि भूमि का पहली बार उपयोग किया जा रहा है तो इसे फफूंद रहित करने के लिए इसका फारमेल्डिहाइड नामक रसायन से उपचार करना आवश्यक है|
1. इसका 25 मि.लि. से 1 लिटर पानी मे घोल बनाएं तथा पौधशाला के लिए चुने गए स्थान पर अच्छी तरह छिडकाव कर भिगोएँ |
2. तत्पश्चात इस स्थान को पॉलिथीन चादर से अच्छी तरह ढँक दें |
3. लगभग एक सप्ताह पश्चात् पॉलिथीन चादर हटाकर इस जगह की अच्छी तरह 3 – 4 बार जुताई व खुदाई कर खुला छोड़ दें जिससे रसायन का असर समाप्त हो जाए |
4. इसके पश्चात् भूमि को अच्छी तरह भुरभुरा बनाएं तथा लगभग उपचार के 15 दिन पश्चात् बुवाई के लिए तैयार करें |
यह उपचार कमरतोड़ तथा क्लेदगलन (डैपिंग ऑफ) नामक बीमारी की रोकथाम में सहायता करेगा |
क्यारी बनाते समय यह ध्यान रखे की प्रति 10 वर्ग मीटर के लिए लगभग 20 से 25 कि.ग्रा. सड़ी गली गोबर की खाद ट्राईकोडर्मा हाजिॅएनम के साथ 1:50 के अनुपात में मिलाकर 200 ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट तथा 15 -25 ग्राम इंडोफिल एम 45 नमक फफूंदनासक और कोई भी उपलब्ध धूल कीटनाशक मिलाएं |
क्यारियाँ 15 -20 से. मी. ऊँची उठी होनी चाहिए |
इनकी चौङाई लगभग 1 मीटर तथा लम्बाई 3 मीटर होनी चाहिए जो कि सुबिधा के अनुसार घटाई – बढाई जा सकती है |
1. बीज का उपचार बुवाई से पहले 2 – 3 ग्रा./कि. ग्रा. बीज की दर से कैप्टन, थीरम, बैवीस्टीन इत्यादि फफूंदनाशकों या ट्राईकोडर्मा हाजिॅएनम से करें जिससे डैपिंग ऑफ नामक बीमारी का प्रकोप कम होगा |
2. बुवाई 5 सें.मी. दूर पंक्तियाँ में 1 सें.मी. गहराई पर करें तथा पतली मिटटी की परत से ढकें |
3. क्यारियों को सूखी घास से ढँक दें तथा फव्वारे से हल्की सिंचाई करें |
4. अंकुरण होने पर घास हटा दें तथा फव्वारे से हलकी सिंचाई से नमी बनायें रखें |
5. कीटों व कमरतोड़ रोग से बचाव के लिए 0.25 प्रतिशत इंडोफिल एम 45 या 2 ग्राम ट्राईकोडर्मा हाजिॅएनम प्रति लिटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें तथा 2 मि. लि. प्रति लिटर पानी के हिसाब से मेलाथीयोन या एण्डोसल्फान का छिडकाव समय-समय पर करते रहें|
6. जब पौधे 8 – 10 सें.मी. ऊँचे हो जायें तो 0.3 प्रतिशत यूरिया का छिडकाव करे. ताकि बढवार अच्छी हो |
7. खरपतवार का नियंत्रण हल्की निराई – गुडाई से प्रति सप्ताह करें तथा अवांछनीय पौधे भी निकाल दें |
8. 4 – 6 सप्ताह आयु वाले पौधे 12 – 15 से.मी. ऊँचे तथा रोपाई योग्य हो जाते हैं |
9. रोपाई से 3-4 दिन पूर्व सिंचाई रोक दें तथा उखाड़ने से एक घंटा पहले हल्की सिंचाई करें | ऐसा करने से जड़ें नहीं टूटेंगी |
रोपण सांयकाल में ही करें तथा हल्की सिंचाई करें |
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