मूली उत्पादन की उन्नत तकनीकी तकनीक
महत्व – मूली का उपयोग प्रायः सलाद एवं पकी हुई सब्जी के रूप में किया जाता है इसमें तीखा स्वाद होता है। इसका उपयोग नाष्ते में दही के साथ पराठे के रूप में भी किया जाता है। इसकी पत्तियों की भी सब्जी बनाई जाती है। मूली विटामिन सी एवं खनीज तत्व का अच्छा स्त्रोत है। मूली लिवर एवं पीलिया मरीजों के लिए भी अनुसंषित है।
जलवायु
मूली के लिए ठण्डी जलवायु उपयुक्त होती है लेकिन अधिक तापमान भी सह सकती है। मूली की सफल खेती के लिए 10-150से. तापमान सर्वोत्तम माना गया है।
भूमि –
सभी प्रकार की भूमि उपयुक्त रहती है लेकिन रेतीली दोमट भूमि अधिक उपयुक्त रहती है।
भूमि की तैयारी-
मूली के लिए गहरी जुताई की आवश्यकता होती है। एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने के बाद 2-3 बार कल्टीवेटर चलाकर भूमि को समतल कर लें।
मूली की उन्नत किस्में :-पूसा चेतकीवंशावलीडेनमार्क जनन द्रव्य से चयनितजारी होने का वर्षराज्य प्रजाति विमोचन समिति-1988अनुमोदित क्षेत्रसम्पूर्ण भारतऔसत उपज250 कुन्तल/हेक्टेयरविशेषतायेंपूर्णतया सफेद मूसली, नरम, मुलायम, ग्रीष्म-ऋतु की फसल में कम तीखी जड़ 15-22 से.मी. लम्बी, मोटी जड़, पत्तियां थोड़ी कटी हुई, गहरा हरा एवं उध्र्वमुखी, 40-50 दिनों में तैयार ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु हेतु
उपयुक्त फसल (अप्रैल-अगस्त )जापानीज़ व्हाइटजारी होने का वर्षकेन्द्र द्वारा अनुशंसित विदेशी किस्म1988अनुमोदित क्षेत्रउच्च एवं निम्न पहाड़ी क्षेत्रऔसत उपज25-30 टन/हेक्टेयरविशेषतायेंजड़ें सफेद लम्बी, बेलनाकार, एवं 60 दिनों में तैयार गस्त )पूसा हिमानीअनुमोदित वर्ष1970अनुमोदित क्षेत्रउच्च एवं निम्न पहाड़ी क्षेत्रऔसत उपज32-5 टन/हेक्टेयरविशेषतायेंजड़ें 30-35 से. मी. लम्बी, मोटी, तीखी,अंतिम छोर गोल नहीं होते सफेद एवं टोप हरे होते है। हल्का तीखा स्वाद एवं मीठा फ्लेवर, बोने के 50 से 60 दिन में परिपक्व, दिसम्बर से फरवरी में तैयार
पूसा रेशमी अनुमोदित क्षेत्रसम्पूर्ण भारतऔसत उपज32.5 टन/हेक्टेयरविशेषतायेंजड़ें 30-35 से.मी. लम्बी, मध्यम मोटाई, शीर्ष में हरापन लिए हुए सफेद मोटी, तीखी होती है। यह किस्म बुवाई के 55 से 60 दिन में तैयार हो जाती है।अन्य उन्नत किस्मे :-
जोनपुरी मूली, जापानी सफेद, कल्याणपुर, पंजाब अगेती, पंजाब सफेद, व्हाइट लौंग, हिसार मूली एवं संकर किस्मे आदि।
महत्व – मूली का उपयोग प्रायः सलाद एवं पकी हुई सब्जी के रूप में किया जाता है इसमें तीखा स्वाद होता है। इसका उपयोग नाष्ते में दही के साथ पराठे के रूप में भी किया जाता है। इसकी पत्तियों की भी सब्जी बनाई जाती है। मूली विटामिन सी एवं खनीज तत्व का अच्छा स्त्रोत है। मूली लिवर एवं पीलिया मरीजों के लिए भी अनुसंषित है।
जलवायु
मूली के लिए ठण्डी जलवायु उपयुक्त होती है लेकिन अधिक तापमान भी सह सकती है। मूली की सफल खेती के लिए 10-150से. तापमान सर्वोत्तम माना गया है।
भूमि –
सभी प्रकार की भूमि उपयुक्त रहती है लेकिन रेतीली दोमट भूमि अधिक उपयुक्त रहती है।
भूमि की तैयारी-
मूली के लिए गहरी जुताई की आवश्यकता होती है। एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने के बाद 2-3 बार कल्टीवेटर चलाकर भूमि को समतल कर लें।
मूली की उन्नत किस्में :-पूसा चेतकीवंशावलीडेनमार्क जनन द्रव्य से चयनितजारी होने का वर्षराज्य प्रजाति विमोचन समिति-1988अनुमोदित क्षेत्रसम्पूर्ण भारतऔसत उपज250 कुन्तल/हेक्टेयरविशेषतायेंपूर्णतया सफेद मूसली, नरम, मुलायम, ग्रीष्म-ऋतु की फसल में कम तीखी जड़ 15-22 से.मी. लम्बी, मोटी जड़, पत्तियां थोड़ी कटी हुई, गहरा हरा एवं उध्र्वमुखी, 40-50 दिनों में तैयार ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु हेतु
उपयुक्त फसल (अप्रैल-अगस्त )जापानीज़ व्हाइटजारी होने का वर्षकेन्द्र द्वारा अनुशंसित विदेशी किस्म1988अनुमोदित क्षेत्रउच्च एवं निम्न पहाड़ी क्षेत्रऔसत उपज25-30 टन/हेक्टेयरविशेषतायेंजड़ें सफेद लम्बी, बेलनाकार, एवं 60 दिनों में तैयार गस्त )पूसा हिमानीअनुमोदित वर्ष1970अनुमोदित क्षेत्रउच्च एवं निम्न पहाड़ी क्षेत्रऔसत उपज32-5 टन/हेक्टेयरविशेषतायेंजड़ें 30-35 से. मी. लम्बी, मोटी, तीखी,अंतिम छोर गोल नहीं होते सफेद एवं टोप हरे होते है। हल्का तीखा स्वाद एवं मीठा फ्लेवर, बोने के 50 से 60 दिन में परिपक्व, दिसम्बर से फरवरी में तैयार
पूसा रेशमी अनुमोदित क्षेत्रसम्पूर्ण भारतऔसत उपज32.5 टन/हेक्टेयरविशेषतायेंजड़ें 30-35 से.मी. लम्बी, मध्यम मोटाई, शीर्ष में हरापन लिए हुए सफेद मोटी, तीखी होती है। यह किस्म बुवाई के 55 से 60 दिन में तैयार हो जाती है।अन्य उन्नत किस्मे :-
जोनपुरी मूली, जापानी सफेद, कल्याणपुर, पंजाब अगेती, पंजाब सफेद, व्हाइट लौंग, हिसार मूली एवं संकर किस्मे आदि।
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