Saturday, March 24, 2018

करेला की उन्नत खेती कैसे करें ! ( Farming of Bitter Gourd )


करेला की उन्नत खेती कैसे करें ! (Farming of Bitter Gourd)

करेला (Bitter Gourd) एक लता है, जिसके फलों की सब्जी बनती है| इसका स्वाद खट्टा होता है| करेला (Bitter Gourd) की खेती पुरे भारत में की जाती है| और यह सदियों से उगाई जाने वाली फसल है| करेला की सब्जी शुगर की बीमारी वाले लोग अधिक प्रयोग करते है| यहां तक की कच्चे करेले (Bitter Gourd) का रस निकाल कर भी प्रयोग करते है| भारत में इसकी खेती खरीफ और जायद में बहुयात में की जाती है|

किसान भाई करेले (Bitter Gourd) की खेती अपने व्यवसाय के लिए कर सकते है| इसके लिए आप को करेले की खेती की जानकारी और कुछ प्रमुख बातो पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी| ताकि आप अच्छी पैदावार और अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सके| यहां करेले की खेती कैसे करे और उन प्रमुख बातों का विस्तार से वर्णन किया गया है| यदि किसान भाई जैविक पद्धति से खेती करना चाहते है तो यहाँ पढ़ें- जैविक खेती कैसे करें पूरी जानकारी


करेले के लिए उपयुक्त जलवायु और भूमि (Climate and Soil Suitable for Bitter Gourd)
1. करेले की खेती के लिए समशितोषण जलवायु उपयुक्त होती है| इसके लिए 18 से 35 डिग्री सेल्शियस तापमान उपयुक्त रहता है| इसको गर्म और ठंडे मौसम दोनों में उगाया जा सकता है|

2. करेले (Bitter Gourd) के लिए हल्की दोमट तो दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है| वैसे इसको सभी प्रकार की उपजाऊ भूमि में उगाया जा सकता है| जिसका पीएच मान 6.5 से 7.0 होता है|


किस्में और खेत की तैयारी (Preparation Varieties and Fields)
1. करेले की उन्नत किस्मे इस प्रकार है| अच्छी पैदावार में किस्मों का सबसे बड़ा योगदान रहता है|

रेशमा- इस किस्म के फल मध्यम आकार से थोड़ा बड़ी और हरे रंग के होते है| यह भारत के पश्चिमी क्षेत्र में काफी लोकप्रिय है|

पूसा 2 मौसमी- यह जल्दी तैयार होने वाली फसल है| इसके फल मध्यम लम्बे और हरे रंग के कोमल होते है| इस किस्म को वर्षा कालीन और ग्रीष्मकालीन फसल के रूप में उगाया जाता है| इसके फल बुवाई से 60 से 70 दिन बाद तुड़ाई के योग्य हो जाते है| इसके औसत पैदावार प्रति हेक्टेयर 100 से 110 क्विंटल तक हो जाती है|

हिसार सलेक्शन- इस किस्म के फल मध्यम आकार और हरे रंग के होते है| यह भारत के पश्चिमी क्षेत्र में काफी लोकप्रिय है|

कोयमबुर लौंग- इस किस्म की लताएं बहुत अधिक फैलती है| और फल भी अधिक लगते है| इसके फल सफेद और लम्बे होते है| यह खरीफ की किस्म है| यह 90 से 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावर देती है|

अर्का हरित- यह कम फैलने वाली फसल है| इसके फल मध्यम आकार और हरे रंग के होते है| इसके फलों में बीज की मात्र कम होती है| यह फसल गर्मी और बारिस दोनों मौसम के लिए उपयुक्त है| यह किस्म 90 से 120 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की पैदावार देती है| इसके फलों में कडवापन भी कम होता है|

सी 16- यह एक उन्नत किस्म है| इसके फल हरे रंग के होते है| इसकी प्रति हेक्टयर पैदावार 125 से 130 क्विंटल तक होती है|

करेले (Bitter Gourd) की अन्य किस्में- कल्यानपुर बारामासी, प्रिया, एमडीयू- 1, पूसा विशेष, फैजाबादी बारामासी, आरएचबीबीजी- 4, केबीजी- 16, पूसा संकर- 1, पंजाब- 14, प्रीति, सी- 96, आइएचआर- 7 और पीवीआईजी- 1 आदि किस्मे प्रमुख है|

2. करेले की फसल के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से और 3 से 4 जुताई देशी हल या कल्टीवेटर से कर के खेत को भुरभुरा बना लेना चाहिए|

बीज बुवाई और खाद उर्वरक (Seed Sowing and Fertilizer)

8862 Bitter gourd करेला,कारले.

करेले की खेती का मल्टीप्लायर के साथ नियोजन.

बीजों की बुवाई करने से पहले बीजों को मल्टीप्लायर के साथ बीजोपचारित करें, बीजोपचार करने का तरीका अलग से बताया गया है.

फसल लगाते समय २०० लीटर पानी में २०० ग्राम मल्टीप्लायर मिलाकर जहाँ-जहाँ बीज लगाए हैं वहां १०० मिली घोल डालें, ऐसा करने से फसल तेजी से बढ़ेगी तथा ताकतवर बानी रहेगी.

फसल लगाते समय १ किलो मल्टीप्लायर देना है, जब तक उत्पादन मिलता रहे हर महीने १ किलो मल्टीप्लायर देना है, देने की विधि अलग से बताई गई है.

छिड़काव से फसल पर ज्यादा अच्छा और तुरंत परिणाम मिलता है, इसलिए जमीन से देने के साथ-साथ प्रति सप्ताह १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर + २ मिली ऑल क्लियर मिलाकर छिड़काव करें, इसमें आवश्यकतानुसार रासायनिक दवाइयां भी मिलाई जा सकती हैं.

रासायनिक खाद एकदम से बंद नहीं करना है, उसका प्रमाण २० प्रतिसत कम करिये, जब आपको उत्पादन बढ़कर मिले, तब अगली फसल में रासायनिक खाद और कम करिये, बढ़ते उत्पादन के साथ रासायनिक खाद कम होते-होते कुछ सालों में आपका रासायनिक खाद शून्य हो जायेगा.

मल्टीप्लायर से फसल बलवान बनेगी, फसल पर किटक तथा रोग कम से कम आएंगे, रासायनिक दवाओं पर खर्च होनेवाले पैसों की बचत होगी, फसल पर फंगस की समस्या भी आती है, ऑल क्लियर फंगस की समस्या कम से कम करने में सक्षम है, इसके बावजूद अगर कोई किटक तथा रोग आते हैं, तब तुरंत रासायनिक दवाई का छिड़काव करें.

मल्टीप्लायर का इस्तेमाल होने से खर्च में बचत होती है तथा उत्पादन बढ़कर मिलता है.

1. करेले की खेती के लिए 3 से 3.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज मेड या नाली बनाकर लगाने के लिए उपयुक्त होता है| बीज उपचार के लिए 2 ग्राम बाविस्टिन या 2 ग्राम कैप्टान प्रति लिटर पानी में मिलाकर बीज को 3 से 4 घंटे के लिए भिगोकर उसको छाया में सुखाकर उसकी बुवाई करनी चाहिए|

2. जैसा की पहले से आप को पता होगा की करेले (Bitter Gourd) की फसल खरीफ और जायद मौषम में की जाती है| खरीफ की बुवाई जून से जुलाई तक और जायद की जनवरी से फरवरी तक की जाती है| खेत की तैयारी के बाद 40 से 50 सेंटीमीटर छोड़ी और चौड़ाई 2 से 2.5 मीटर की दुरी पर 20 से 30 सेंटीमीटर मैड या नालियां बनाइए हो सके तो पूर्व से पश्चिम दिशा में बनाएं| इसके बाद 2 से 3 बीज एक ही जगह और पौधे से पौधे की दुरी 45 से 55 सेंटीमीटर रखनी चाहिए|

3. करेले की फसल के लिए 250 से 300 क्विंटल गली सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट खाद दूसरी जुताई के समय डालनी चाहिए| ताकि वह मिट्टी में अच्छे से मिल जाए| इसके साथ साथ मल्टीप्लायर 3 किलो, 60 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और 50 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर डालनी चाहिए| फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा आखरी जुताई में डाले बाकि बची हुई नाइट्रोजन की मात्रा जब पौधों के 7 से 8 पत्ती बन जाए तब डालनी चाहिए|

जल और खरपतवार प्रबंधन (Water and Weed Management)

1. जायद की खेती मई 1 से 10 दिन के अन्तराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए| खरीफ और बारिश की खेती में बारिश नही होती है, तो अव्स्यक्तानुसार सिंचाई करनी चाहिए|

2. करेले (Bitter Gourd) में खरीफ और बारिश के समय ज्यादा खरपतवार उगते है| खरपतवार नियन्त्रण के लिए बुवाई के 20 से 25 दिन बाद से आवश्यकतानुसार निराई गुड़ाई करते रहना चाहिए| या फिर 50 मिली पेंडामेथालिन का 15 लिटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर बुवाई के 2 दिन  बाद तक नम भूमि में छिड़काव कर सकते है| जिसे खरपतवार का जमाव ही नही होगा|

रोग और कीट रोकथाम (Disease and Pest Prevention)

1. करेला की खेती में विषाणु रोग जैसे फफूंदी और मोजक की बीमारी लगती है| इसकी रोकथाम की लिए बीज को अच्छे से उपचारित कर के बोना चाहिए| रोग ग्रस्त पौधों को खेत से उखाड़ कर जला दे या फिर मिट्टी में दबा देना चाहिए| इसकी रोकथाम के लिए 42 मिली मोनोक्रोटोफास + मल्टीप्लायर 20 ग्राम + आल क्लियर 3 मिली + स्प्रे प्लस 1 मिली को 15 लिटर पानी में घोल बनाकर प्रति 10 से 15 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करना चाहिए|

2. करेले (Bitter Gourd) की फसल में ज्यादातर पत्ती, तना और फल बेधक किट लगते है| इनकी रोकथाम के लिए 32.5 मिली मैलाथियान 50 ईसी+ मल्टीप्लायर 20 ग्राम + आल क्लियर 3 मिली + स्प्रे प्लस 1 मिली या एंडोसल्फान 32.5 मिली + मल्टीप्लायर 20 ग्राम + आल क्लियर 3 मिली + स्प्रे प्लस 1 मिली को 15 लिटर पानी में घोल बनाकर प्रति 10 से 15 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करते रहना चाहिए|

फल तोड़ाई और पैदावार (Fruit Tumble and Yield)

1. जब आप को लगे की करेले (Bitter Gourd) के फल उपयोग के योग्य हो गये है, तो उनकी तुड़वाई शुरू कर देनी चाहिए| और हर 6 या 7 दिन के बाद तुड़वाई करनी चाहिए, इसे पैदावार भी अच्छी मिलेगी और फल के भाव भी अच्छे मिलेगे| वैसे करेले की फसल बुवाई के 70 दिन के आसपास फल तोड़ने योग्य हो जाती है|

2. फसल के अनुकूल स्थितियां और उपरोक्त विधि के अनुसार खेती करने के बाद करेले की प्रति हेक्टेयर पैदावार 120 से 150 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार होनी चाहिए|

उपरोक्त विधि के अनुसार किसान भाई करेले की खेती कर सकते है, और उसे अच्छी पैदावार व अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते है|




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