Sunday, March 25, 2018

गेहूं की सूखी बुवाई(Sowing of wheat)

गेहूं की सूखी बुवाई भारत में - 

भोपाल, अक्टूबर : उत्तर भारत के लगभग सभी प्रमुख राज्यों में गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इनमें मध्य प्रदेश जैसे अपेक्षाकृत कम पानी वाले राज्य भी शामिल हैं। यहां भी गेहूं की खेती की जाती है। इसके लिए कई ऐसी किस्में उपलब्ध हैं जिनमें कम पानी की आवश्यकता होती है।

अगर दो या तीन पानी ही सिंचाई के लिए उपलब्ध हों तो गेहूं की कम पानी वाली किस्मों की मदद से सूखी बुवाई की जानी चाहिए। इस विधि में पलेवा न देकर खरीफ की छंटाई के तत्काल बाद 2-3 जुताई करके गेहूं की बुवाई कर दी जाती है। बोवनी के तत्काल बाद एक सिंचाई करनी होती है। दूसरी सिंचाई 45 दिन के बाद की जाती है। ज्यादातर मामलों में फसल के लिए इतनी सिंचाई पर्याप्त होती है जबकि कई बार एक सिंचाई और करनी होती है।

कृषि विज्ञान केंद्र मझगंवा के कृषि वैज्ञानिक विनोद तिवारी(भारतीय) कहते हैं कि कम पानी वाली किस्मों में जेडब्ल्यू 17 किस्म एक या दो पानी में ही पक कर तैयार हो जाती है। वहीं जेडब्ल्यू 3020 किस्म को एक से तीन पानी की जरूरत होती है। वहीं एचआई 1531 किस्म को भी तीन पानी तक सिंचाई की जरूरत होती है। ये सभी किस्में प्रति हेक्टेयर 30 से 40 क्विंटल तक की उपज देती हैं।

गेहूं की सूखी बुवाई उन किसानों के लिए बहुत बड़ी राहत है जिनके यहां पानी की कमी देखने को मिलती है।

गेहूँ फसल के अधिक उत्पादन हेतु किस प्रकार करें

 बीजोपचारबीज उपचार 3 ग्राम थाईरम या एग्रोसन जी.एन. या कैपटन या विटावेक्स प्रति किलो बीज से उपचार किया जा सकता है।बीज को फंफूदनाशक के साथ अच्छी तरह मिला लें ।बीज उपचारित करने के बाद उन्हें छाया में रख दें जिससे फफूदनाशक का असर रहे।अगर उपचारित बीज का उपयोग कर रहे हो, तो उन्हें उपचारित न करें।बोनी के लिए प्रमाणित बीजों का ही उपयोग करना चाहिए जो कि प्राय:उपचारित रहते हैं।सूर्यकिरणों से उपचारबीजों को ठन्डे पानी में भिगोकर गर्मी के महीनों में सुबह के समय 8 से 12 बजे तक रखे और दोपहर बाद सुखाएं।ऐसा करने पर फंफूदनाशक के उपयोग बिना रोग नियंत्रण किया जा सकता है।सुखाते समय सावधानियां लेना चाहिए जिससे बीज की अकुंरण क्षमता बनी रहे।उगने के बाद रोग के लक्षण दिखने पर ऐसे पौधों को उखाड़ देना चाहिए।बीज शोधनएजोटोबेकटर्स या एजोस्पाईरिलम से बीजों का उपचार कर सकते हैं।गुड़ का एक लीटर का घोल बनाकर उसमें 150 ग्राम के 5 पैकेट एजोटोबेकटर्स या एजोस्पाईरिलम को अच्छी तरह मिला लें।80-100 कि.ग्रा. बीजों पर छिड़कें।कम मात्रा में बीजों को लें जिससे अच्छी तरह मिल जाए।हवा में छाया में सुखाए फिर तुरन्त बोनी कर दें।निवेशक की मात्रा बीज दर के अनुसार ही लें।निवेशक बीज को सूर्य की रोशनी और ताप से बचायें।

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