तरबूज की फसल
पानी भरा रहे ऐसे क्षेत्र मे फसल को धान के साथ फेरबदल करे जो मृदुल व चूर्णिल आसिता के प्रति असरकारक है।
बुवाई तकनीक
जमीन तैयारी
अच्छे विकास हेतु 15 टन गोबरखाद या 500 किलो दिवेली खाद / एकड़ के हिसाब से डालें। जमीन में 2 से 3 जुताई कर, समतल बनाकर 1.5 से 2 मीटर के अंतर पर कतारें बनाए।
ट्राइकोडर्मा विरडी 250 ग्राम 10 किलो गोबर खाद में मिलाकर फसल के विकास की शुरुआत की अवस्था में कतारों में देने से जमीन जन्य फफूंद से होने वाले सुखारा रोग से बच सकते है।
किस्में
वरुण, युवराज, आएशा, मधुबाला, चेतन, आइस्बोक्स, एन. एस 295, , एन. एस 34 , , एन. एस 450 , अर्जुन, कैननबाल, सूमों, बीएसएस 2000, केएसपी 1081, लालिमा, राजा ।
बीज उपचार
बीज की परत नरम बनाने व अच्छे अंकुरण हेतु बीज को बुवाई से पहले गरम पानी में 30 मिनिट डुबोए जिससे सुषुप्तवस्था दूर होगी।
प्रारंभ में ज़मीन, बीज जन्य रोग से बचने के लिए बुवाई से पहले कार्बेनडाज़िम 50WP @3gm /kg बीज के हिसाब से उपचारित करें।
बुवाई तकनीक
खरीफ फसल के अच्छे विकास हेतु, बुवाई जून - जुलाई में 2-2.5 m x 1-1.5 मीटर के अंतर पर करें।
ग्रीष्मकालीन फसल की बुवाई जनवरी या फरवरी में करें।
अच्छे विकास हेतु अंकुरण के 8-10 दिन बाद 1 जगह पर 1 स्वस्थ पौधा रखे,बाकी के पौधे निकाल दे, पौधे का विकास नाली के 1 तरफ होने दे।
नर्सरी तकनीक
1. घीया - कद्दू जाती की सब्ज़ियों को प्रोट्रेज़ या लिफाफों में,कम कीमत वाले पोलीहोऊस या नीवियाँ पोलीटनल्ज़ में रख कर तैयार कर सकते हैं।इस तरह करने से फसल डेढ़ महीने पहले तैयार हो सकती है।
लिफाफों में पनीरी तैयार करने के लिए 15X10 आकार और 100 गेज़ मोटाई के लिफाफों का प्रोयग करें। लिफाफों के नीचे मोरीयाँ कर दें।
लिफाफों की भराई के लिए गली-सड़ी रूड़ी और मिट्टी बराबर अनुपात में मिलाएँ।एक एकड़ की पौध के लिए 2.5 मरले की 3 इंच सतह मिट्टी की आवश्यकता है।मिश्रण में 8किलो DAP डालें।
लिफाफों की भराई के लिए गली-सड़ी रूड़ी और मिट्टी बराबर अनुपात में मिलाएँ।एक एकड़ की पौध के लिए 2.5 मरले की 3 इंच सतह मिट्टी की आवश्यकता है।मिश्रण में 8किलो DAP डालें।
एक एकड़ में 3334 पौधे लगेंगे, 3400 लिफाफे तैयार कर लें।इन पौधों को रखने के लिए 2.5-3 मरले जगह की आवश्यकता है।
बीज का पुंगराव चैक कर लें।बीज को 3 ग्राम कार्बैंडेज़िम प्रति किलो बीज के हिसाब से उपचार करें। प्रति लिफाफा 2 बीज डालें और लगातार पानी लगाएँ।
लिफाफों की बीजाई उपरांत ठंड से बचाएँ, गर्माहट देने के लिए प्लास्टिक की सुरंगों में रखें।गर्माहट देने से जड़ों और तने का विकास बहुत जल्दी होता है।
2. पॉली सुरंग - जल्दी फसल प्राप्ति हेतु दिसंबर शुरू मे 2.50mtr चौड़े बेड बनाएँ व छल्ले के आकार वाले2mtrलंबे व45-60cm ऊंचे सरिये,2-2mtr की दूरी पर लगाएँ। -बैडो पर रिंग दबा कर ऊपर100 गेज़ की प्लास्टिक शीट डाले।1तरफ से शीट को पूरा दबा दें व दूसरी तरफ थोड़ी दूरी पर मिट्टी डालें।
खरपतवार नियंत्रण
खरपतवार के प्रभावी नियंत्रण हेतु बुवाई के तुरंत बाद पेन्डीमेथालिन 30EC (स्टोम्प, टाटापेनिडा) @1.3 लीटर/ एकड़/ 200 लीटर पानी मे मिलाकर छिड़के।
पानी भरा रहे ऐसे क्षेत्र मे फसल को धान के साथ फेरबदल करे जो मृदुल व चूर्णिल आसिता के प्रति असरकारक है।
बुवाई तकनीक
जमीन तैयारी
अच्छे विकास हेतु 15 टन गोबरखाद या 500 किलो दिवेली खाद / एकड़ के हिसाब से डालें। जमीन में 2 से 3 जुताई कर, समतल बनाकर 1.5 से 2 मीटर के अंतर पर कतारें बनाए।
ट्राइकोडर्मा विरडी 250 ग्राम 10 किलो गोबर खाद में मिलाकर फसल के विकास की शुरुआत की अवस्था में कतारों में देने से जमीन जन्य फफूंद से होने वाले सुखारा रोग से बच सकते है।
किस्में
वरुण, युवराज, आएशा, मधुबाला, चेतन, आइस्बोक्स, एन. एस 295, , एन. एस 34 , , एन. एस 450 , अर्जुन, कैननबाल, सूमों, बीएसएस 2000, केएसपी 1081, लालिमा, राजा ।
बीज उपचार
बीज की परत नरम बनाने व अच्छे अंकुरण हेतु बीज को बुवाई से पहले गरम पानी में 30 मिनिट डुबोए जिससे सुषुप्तवस्था दूर होगी।
प्रारंभ में ज़मीन, बीज जन्य रोग से बचने के लिए बुवाई से पहले कार्बेनडाज़िम 50WP @3gm /kg बीज के हिसाब से उपचारित करें।
बुवाई तकनीक
खरीफ फसल के अच्छे विकास हेतु, बुवाई जून - जुलाई में 2-2.5 m x 1-1.5 मीटर के अंतर पर करें।
ग्रीष्मकालीन फसल की बुवाई जनवरी या फरवरी में करें।
अच्छे विकास हेतु अंकुरण के 8-10 दिन बाद 1 जगह पर 1 स्वस्थ पौधा रखे,बाकी के पौधे निकाल दे, पौधे का विकास नाली के 1 तरफ होने दे।
नर्सरी तकनीक
1. घीया - कद्दू जाती की सब्ज़ियों को प्रोट्रेज़ या लिफाफों में,कम कीमत वाले पोलीहोऊस या नीवियाँ पोलीटनल्ज़ में रख कर तैयार कर सकते हैं।इस तरह करने से फसल डेढ़ महीने पहले तैयार हो सकती है।
लिफाफों में पनीरी तैयार करने के लिए 15X10 आकार और 100 गेज़ मोटाई के लिफाफों का प्रोयग करें। लिफाफों के नीचे मोरीयाँ कर दें।
लिफाफों की भराई के लिए गली-सड़ी रूड़ी और मिट्टी बराबर अनुपात में मिलाएँ।एक एकड़ की पौध के लिए 2.5 मरले की 3 इंच सतह मिट्टी की आवश्यकता है।मिश्रण में 8किलो DAP डालें।
लिफाफों की भराई के लिए गली-सड़ी रूड़ी और मिट्टी बराबर अनुपात में मिलाएँ।एक एकड़ की पौध के लिए 2.5 मरले की 3 इंच सतह मिट्टी की आवश्यकता है।मिश्रण में 8किलो DAP डालें।
एक एकड़ में 3334 पौधे लगेंगे, 3400 लिफाफे तैयार कर लें।इन पौधों को रखने के लिए 2.5-3 मरले जगह की आवश्यकता है।
बीज का पुंगराव चैक कर लें।बीज को 3 ग्राम कार्बैंडेज़िम प्रति किलो बीज के हिसाब से उपचार करें। प्रति लिफाफा 2 बीज डालें और लगातार पानी लगाएँ।
लिफाफों की बीजाई उपरांत ठंड से बचाएँ, गर्माहट देने के लिए प्लास्टिक की सुरंगों में रखें।गर्माहट देने से जड़ों और तने का विकास बहुत जल्दी होता है।
2. पॉली सुरंग - जल्दी फसल प्राप्ति हेतु दिसंबर शुरू मे 2.50mtr चौड़े बेड बनाएँ व छल्ले के आकार वाले2mtrलंबे व45-60cm ऊंचे सरिये,2-2mtr की दूरी पर लगाएँ। -बैडो पर रिंग दबा कर ऊपर100 गेज़ की प्लास्टिक शीट डाले।1तरफ से शीट को पूरा दबा दें व दूसरी तरफ थोड़ी दूरी पर मिट्टी डालें।
खरपतवार नियंत्रण
खरपतवार के प्रभावी नियंत्रण हेतु बुवाई के तुरंत बाद पेन्डीमेथालिन 30EC (स्टोम्प, टाटापेनिडा) @1.3 लीटर/ एकड़/ 200 लीटर पानी मे मिलाकर छिड़के।
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