Sunday, March 25, 2018

आलू की उन्नत फ़सलायोजन (Potato Advanced Fashions)

आलू की उन्नत फ़सलायोजन
पंजाब और हरियाणा में आलू की अगेती पतझड़ की फसल सितंबर के महीने में, मुख्य पतझड़ की फसल अक्तुबर के महीने में और बसंत ऋतु की फसल जनवरी के महीने में बोई जाती है।
बुवाई हेतु उत्तम मौसम माना जाता है जब दिन का अधिक्तम तापमान 30C से नीचे और रात का 20 C से अधिक न हो।
इसके अलावा मिट्टी की pH 5.5-8 बिजाई हेतु उत्तम मानी जाती हैं।

आलू के साथ महत्वपुर्ण फ़सली चक्र इस प्रकार हैं।
1. धान - आलू - मूँग/ बहार ऋतु की मक्की/ सूरजमुखी
2. धान - आलू - गेहूं
3. खरीफ मक्का - आलू - गेहूँ

बुआई

भूमि की तैयारी


कंद वाली फसल होने के कारण हल्की, गहरी और अच्छी निकासी वाली ज़मीन इसकी बिजाई हेतु अनुकूल होती है। खेत की मिट्टी को भूरभूरी बनाने हेतु खेत मे 2-3 बार दोनों दिशाओं मे हेरो वा टिलर चलाओ और बाद मे सुहागा मारें।
आलू के खेत मे यदि किसी भी तरह का ना नष्ट होने वाला पदार्थ जैसे घास फुस आदि हो तों खेत की त्यारी करतेसमय के उखाड़ कर बाहर निकाल दें यां नष्ट कर दें।
यदि आलू धान के बाद लगाना हैं तो चिज़लर के साथ एक या दो बार बहाई करें।
इससे मिट्टी हवादार बनती है और खेत में पानी नहीं खड़ा होता।
जिन खेतों मे जंतर आदि फसलें हरी खाद के रूप में लगाई गई हो वहाँ अगस्त-सितंबर के पहले साप्ताह फसल की बहाई करके दबा दें।

किस्में

पकने के समय पर आधारित क़िस्मों के तीन समूह है-
1. अगेती किस्में (जल्दी पकने वाली)
2. मध्यम समय लेने वाली
3. देर से पकने वाली किसमें।

प्रयोग के आधार पर तीन समूह है-
1. खपत उत्पादन  (खाने के लिए),
2. प्रोसैसिंग के लिए (चिप्स, फ्रेंच फ्राइस)
3. बीज के लिए (बिजाई के लिए)

बिजाई के समय के आधार पर
अगेती किस्में
कुफऱी चंदरमुखी, कुफरी पुखराज, कुफरी ख्याती, कुफरी सूर्या, कुफरी अशोका, कुफरी जवाहर।
पकने का समय 90-100 दिन।

मध्यम समय वाली किस्में,
कुफरी बादशाह, कुफरी ज्योति, कुफरी बहार ,कुफरी लालिमा, कुफरी सतलुज, कुफरी चिप्सोना-1, कुफरी चिप्सोना-3, कुफरी सदाबहार, कुफरी चिप्सोना-4, कुफरी पुष्कर।
पकने का समय 90-110दिन।

देर से पकने वाली किस्में-
कुफरी सिंधुरी कुफरी फ़्राईसोना और कुफरी बादशाह।
पकने का समय 110-120 दिन।

आलू के बीज की मात्रा उसके आकार के मुताबिक-
28-35mm के लिए 11-12 क्विंटल
35-45mm के लिए 12-13 क्विंटल
45-55mm के लिए 14-17 क्विंटल एकड़।

कच्ची पटाई के लिए 12-18 क्विंटल प्रति एकड़ आलू के बीज की ज़रूरत होती है। कंद का भार 40-50g होना चाहिए और कच्ची पटाई में बीज बिना काटे ही लगाएँ।
ज़रूरी बात!  बीज खरीदते समय बिल मांगना ना भूलें।

बीज उपचार

बीज उपचार
बीज उपचार का सही तरीका है की पहले बीज को फफूंदीनाशक से, फिर कीटनाशक से व अंत मे जैव उर्वरक से शोधित करें। हर चरण के बाद बीज छाया में सुखाएँ।
चारकोल गलन, कोहड़ वा स्कैब की रोकथाम
300gm बोरिक एसिड या 25gm एमिसन प्रति 10 लीटर पानी के घोल में 30 मिनट के लिए डुबो कर बीज कर उपचार करें
या
25gm पेनसिक्युरोन (मोनसरन) प्रति 10लीटर पानी के हिसाब के घोल में 10 मिनट भिगो कर बीज को उपचारें
या
कंदों को 25gm कारबेनडाज़िम (बाविस्टीन/ ज़ेन) प्रति 10 लीटर पानी के हिसाब के घोल में 30 मिनट तक भिगो कर उपचार करे।
कीटनाश्क से बीज उपचार
बीजोपचार हेतु 0.04% (4ml/ 10Ltr पानी ) कीटनाशक इमीडाकलोपरिड (गाउचो/ क्रूज़र) 10मिनिट भिगो कर उपचारित करे।

जैविक तत्वों से बीजोपचार
बीज उपचार के लिए 50gm टराईकोड़रमा विरीडी प्रति 10 Ltr पानी के हिसाब के घोल में 15-20 मिनट के लिए भिगो कर रखें। बिजाई से पहले छाँव में सूखा ले।

पुराने बीज से अच्छे अंकुरण हेतु 1ppm (1ml/ 100Ltr) जिबरेलिक एसिड के घोल मे एक घंटे तक डुबो कर, बीज को ज़मीन पर पतलें बिछा कर छाया में सुखाएं।

बुवाई का समय व तरीका

[Image Source: ICAR-CPRI]
बीज की गहराई उसके आकार के मुताबिक रखें-
28-35mm के लिए 3" (इंच)
35-45mm के लिए 4-5" (इंच)
45-55mm के लिए 6" (इंच) गहराई पर बीजें।

आलू की बिजाई हेतु मेड़ों का अंतर 24-26" (इंच) और आलू से आलू का अंतर बीज वाली फसल के लिए 6" (इंच) और राशन और प्रसेसिंग फसल के लिए 8" (इंच) रखें।
जब कंदों का फुटाव लगभग 3.5mm से 5mm का हो जाए तो इनको बिना नुकसान पहुँचाए खेत में बीज दें।
बिजाई से तुरंत बाद खेत को पानी लगा दें। ध्यान रखें कि मिट्टी नम होनी चाहिए ना कि गीली।
ज़रूरी बातें
1. अगर आलू बीज के लिए लगाए जा रहे हों तो कंदों को काट कर मत लगाएँ, क्योंकि एसा करने से विषाणु रोग एक कंद से दूसरे कंद तक फैलते हैं।
2. ताज़े निकाले आलू के कंद ससुपताव्स्था में होते हैं इसलिए इनको उखाड़ने के एकदम बाद नहीं बीजना चाहिए।

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