Friday, January 12, 2018

भिंडी की उन्नत फसल (Advanced Crop of Bhindi)

भिंडी की उन्नत फसल की महत्वपूर्ण 

1. प्रमाणित और अच्छी गुणवत्ता, अच्छी अकुंरण क्षमता वाले बीजों का उपयोग करें। अपने क्षेत्र के लिए अनुमोदित किस्मों का उपयोग करें।
2. भिंडी गर्म मौसम की फसल है। इसकी खेती 22-35 °C तापमान मे की जा सकती है। 
3. यह फसल पाले और ठंड (12°C तापमान) के प्रति सहनशील नहीं है


बुवाई तकनीक

जमीन की तैयारी
1. अच्छे जलनिकास वाली मिट्टी उपयुक्त है।
2. खेत की तैयारी के लिये 1 बार गहरी जुताई (20-25 सेमी.) करे तथा बाद मे 1 या 2 बार हैरो चलाये।
3. इसके बाद पाटा लगा कर खेत समतल करे।

किस्में/प्रजातियां 
1. उन्नत किसमे:- पंजाब पदमनी, प्रभनी क्रांति, पी-7, अर्का अनामिका, अर्का अभय, काशी प्रगति, कशाई विभूति
2. संकर किस्मे:- वर्षा, विशाल, विजय, शीतला ज्योति, शीतला उपहार, सोनी-1001, क्लासिक-1002, मार्वल-1003, करिश्मा-1004, प्रभावा-225, म्रदुला-251, एमएएचवाई-64, भिंडी नं-10, एमएएचवाई-55, एमएएचवाई-28, ओएच-016, ओएच-152 आदि।

बीजोपचार
1. बीज के अधिक जल्दी अंकुरण (7-10 दिन पहले) हेतु बीज को बुवाई से पहले 24 घंटे तक पानी मे भिगाएँ। सुखाने के बाद बीज उपचार करे।
2. अंकुरण को बढ़ाने और रोगो से बचाने हेतु बीज को 2gm कार्बेण्डाजिम12% + मेंकोजेब63% (सिक्सर, साफ)/ kg बीज की दर से उपचारित करें।

बुवाई तथा बुवाई विधि
1. ग्रीष्मकालीन फसल हेतु बुवाई का सही समय जनवरी के अंतिम सप्ताह से मार्च के मध्य तक है। 
2. वर्षाकालीन फसल के लिए बुवाई का सही समय जून से जुलाई तक है।
3. ग्रीष्मकालीन फसल के लिए कतार से कतार की दूरी 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 20 सेमी रखें। 
4. वर्षाकालीन फसल के लिए कतार से कतार की दूरी 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 50 सेमी रखें।

बीज दर
1. ग्रीष्मकालीन फसल के लिए 5-7 किलो बीज प्रति एकड़ प्रयोग करें।
2. वर्षाकालीन फसल के लिए 3-4 किलो बीज प्रति एकड़ प्रयोग करें।


भिन्डी की फसल की खेती मल्टीप्लायर के साथ.
बीज खेत में लगाने के पूर्व बीजोपचार करना है, बीजोपचार करने का पूरा तरीका अलग से बताया गया है.

बुवाई के साथ किलो मल्टीप्लायर देना है, उसके बाद हर महीना किलो दो बार देना है, मल्टीप्लायर जमीन से देने का तरीका अलग से बताया गया है.
   भिन्डी की फसल में रस चूसने वाले कीड़े तथा इल्ली का अटैक होता रहता है, इसीलिए सप्ताह में एक बार दवाइयों का छिड़काव होता हैकिसी भी कारण से होनेवाले छिड़काव में, १५ लीटर पानी में १५ ग्राम मल्टीप्लायर + मिली ऑल क्लियर मिलाकर छिड़काव करना है, नियमित छिड़काव से फसल बलवान बनेगी, जहरीली दवाओं पर होनेवाले खर्च में बचत होगी.
   रासायनिक खाद एकदम से बंद नहीं करना है, उसका प्रमाण २० प्रतिसत कम करिये, जब आपको उत्पादन बढ़कर मिले, तब अगली फसल में रासायनिक खाद और कम करिये, कुछ सालों में आपका रासायनिक खाद शून्य हो जायेगा.

भिन्डी की फसल में मल्टीप्लायर का कमाल.
    भिन्डी की फसल में  यलोमोझक बहुत नुकसान करता है, विशेषतः गर्मी के दिनों में, यलोमोझक से परेशान किसान भाईपीले पड़ गए पौधे निकाल-निकाल कर खेत से बाहर फेंकते हैं, जो किसान भाई मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करेंगे, उनके खेत में यलोमोझक नहीं आएगा, यलोमोझक आने का कारण फसल को मिलनेवाले आवश्यक भोजन की कमी होता है, मल्टीप्लायर फसल को आवश्यकता से अधिक भोजन प्रदान करता है.
    जिन किसान भाइयों ने मल्टीप्लायर का इस्तेमाल नहीं किया है, और उनकी भिंडी की फसल पर यलोमोझक गया हैवो किसान भाई भी मल्टीप्लायर की मदद से पीले पड़ चुके पौधों को आसानी से हरा बना सकते हैं.
    मल्टीप्लायर इस्तेमाल करने का दूसरा फायदा यह है की, भिन्डी की फसल में दो भिन्डी के बीच का अंतर बहुत ज़्यादा होता हैमल्टीप्लायर इस्तेमाल होनेवाली भिन्डी की फसल में यह अंतर 50% से कम हो जाता है इसके कारण भिंडी नजदीक-नजदीक लगने से उत्पादन डबल हो जाता है.
    गर्मी के दिनों में आनेवाली भिन्डी का रंग हल्का हरा या थोड़ा पीला-पीला होता हैमल्टीप्लायर से उत्पादित भिन्डी का रंग ग्रीन या डार्क ग्रीन मिलता है, परिणामस्वरूप बाजार में ज़्यादा दाम मिलता है.

खरपतवार प्रबंधन

1. खरपतवार के रासायनिक नियंत्रण के लिए बुवाई के तुरंत बाद और फसल उगने से पहले खरपतवारनाशी पेंडीमेथालीन 30ईसी (पेन्डालीन, स्टोम्प) का 7 मिली प्रति लीटर पानी की दर से स्प्रे करे।
2. खडी फसल मे खरपतवार नियन्त्रण के लिये (30-35दिन बाद) निराई गुड़ाई कर के खरपतवार निकाले।

शस्य क्रिया
1. बुवाई के 25 और 45 दिन बाद निंदाई- गुड़ाई कर खरपतवारों को बाहर निकाल दें।


सिंचाई

सिंचाई अनुतालिका
1. ग्रीष्मकालीन फसल मे 5-6 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
2. वर्षाकालीन फसल मे सिंचाई आवश्यकतानुसार करें।

क्रांतिक अवस्था
इस अवस्था में सिचाई अवश्य करें अथवा उत्पादन में कमी संभव है ;
1. बुवाई के तुरंत बाद 
2. फूल आने से पहले
3. फल आते समय

रोग नियंत्रण

चूर्णिल आसिता 
चूर्णिल आसिता के कारण चूर्ण युक्त भूरे धब्बे हो जाते है रोकथाम हेतु 500 ग्राम सल्फर 80% डबल्यूपी प्रति एकड़ प्रति 200 लीटर पानी मे छिड़कें।

आद्रगलन
1. आद्रगलन के लिए ठंडा, अधिक आद्रता, गीली मिट्टी, सख्त मृदा, पौधों की अधिक संख्या अनुकूल है।
2. आद्रगलन से पौधे उगाने से पहले ही मर जाते है।
3. आद्र गलन की रोकथाम हेतु मिट्टी को 2 ग्राम मेटलेक्सिल 8% + मेंकोजेब 64% (रिडोमिल एमज़ेड, कोरोमिल) प्रति लीटर पानी के घोल से सिंचित करें।

पीत शिरा मोजेक 
1. यह भिंडी मे बहुत प्रचलित वाइरस रोग है।
2. यह रोग पौधे की किसी भी अवस्था पर सकता है।
3. यह रोग सफ़ेद मक्खी के कारण फैलता है।
4. रोकथाम हेतु रोगी पौधो को निकाल कर गाड़ दें या जला दें।
5. समय पर सफ़ेद मक्खी की रोकथाम के उपाए अपनाएं।

अन्य समस्याएँ

पीलापन
पत्तियों पर पीलापन की रोकथाम हेतु 35 ग्राम प्रोपिनेब 70WP + 75 ग्राम घुलनशील एनपीके (19:19:19) प्रति 15ली पानी मे छिड़के।

सूत्रककृमि
1. सूत्रकृमि के प्रकोप से पौधा अविकसित रह जाता है. जडे छोटी रह जाती है जिससे उत्पादन प्रभावित होता है।
2. नियंत्रण के लिये गर्मियो मे गहरी जुताई करे, प्रतिरोधी किस्म का चयन करें. गैर दलहनी फसलो को जैसे मक्का, धान या मूंगफली को फसल चक्र मे शामिल करे. रसायनिक नियंत्रण प्रकोप के अधार पर 10-15 किलो कार्बोफ्यूरान प्रति एकड़ का प्रयोग करे।

फसल कटाई से जुड़ी जानकारी

तुड़ाई
1. जब भिंडी का फल चमकीले हरे रंग मे परवर्तित हो जाए तब भिंडी की तुड़ाई करें।

छँटाई ग्रेडिंग
1. तुड़ाई के बाद फलो को छाया मे रखें।
2. रोगग्रस्त और विकृत भिंडियां अलग कर दें।
3. बाज़ार मे भेजने से पहले फलो को उनके आकार के अनुसार ग्रेडिंग करें।

प्रसंस्करण मूल्य संवर्धन
1. तुड़ाई के बाद फलों को डलिया मे पेक कर जूट के बोरे से ढक कर नजदीक के बाज़ार मे ले जाएँ।
2. बाहर भेजने हेतु फलो को 2.5 किलो के बॉक्स मे खुला भरें।

3. यदि फलो को 7-10°C तापमान और 95% सापेक्ष आद्रता पर रखने से 8-10 दिन तक भंडार किया जा सकता है।


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