सेवंती के फूलों की खेती से करोड़पति बने किसान
बैतूल जिले के आठनेर
विकासखंड के गुनखेड़ गाँव के कृषक हनुमंतराव पुत्र कृष्णराव कनाठे पूरे गांव में
विकास की मिसाल बन गये है। पूर्व में अपनी ढाई हेक्टेयर जमीन पर परंपरागत रूप से
खेती करते थे। वर्ष 2002 में उद्यानिकी विभाग के
संपर्क में आने पर एक हजार वर्ग मीटर पर सेवंती के फूलों की खेती प्रारंभ की। पहले
ही वर्ष में मेहनत रंग लाई और मात्र 3 हजार रुपये खर्च करके 55 हजार रुपए की शुद्ध आय
प्राप्त हुई। सेवंती के फूलों से हुए इस लाभ से प्रोत्साहित होकर हनुमंतराव ने
अगले वर्ष इसके दुगने क्षेत्र में सेवंती के फूलों की खेती की। अगले वर्ष भी फूलों
की खेती से आशातीत लाभ मिलने से प्रोत्साहित होकर हनुमंतराव वर्ष-दर-वर्ष फूलों की
खेती का क्षेत्र बढ़ाते रहे। आज लगभग 2.5 एकड़ जमीन में सेवंती, रजनीगंधा, ग्लेडियोलस, गेंदा, डेजी एवं अन्य फूलों की
खेती कर लाभ कमा रहे हैं।
नई पीढ़ी के हनुमंतराव नई
तकनीकी को अपनाने में भी पीछे नहीं हैं। वर्ष 2016-17 में उद्यानिकी विभाग की संरक्षित खेती योजना का लाभ लेते
हुये विभाग से 4 लाख 67 हजार 500 रूपये का अनुदान प्राप्त कर एक हजार वर्गमीटर में पॉली
हाउस निर्माण कर वहां सेवंती की खेती करना प्रारंभ किया। खुले क्षेत्र में 1.5 एकड़ में सेवंती की खेती से लगभग 30 क्विंटल फूल का उत्पादन हो रहा है। इसे औसतन 125 रूपये किलो मूल्य पर स्थानीय बाजार एवं नागपुर
बाजार में बेचा जा रहा है। एक हजार वर्गमीटर के पॉलीहॉउस में लगभग 18-20 क्विंटल सेवंती फूल का उत्पादन हो रहा है।
पॉली हाउस में उत्पादित फूल की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण फूल औसतन 250 रूपये प्रति किलो के मूल्य पर आसानी से बिक
जाते हैं। लगभग एक एकड़ जमीन पर अन्य फूल जैसे रजनीगंधा, ग्लेडियोलस, गेंदा आदि की खेती करते
हैं। वर्तमान में सेवंती एवं अन्य फूलों की खेती से 2.5 एकड़ जमीन पर उन्हें प्रतिवर्ष 7,50,000 से 8,00,000 रूपये तक का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है।
फूलों की खेती से हो रहे
लाभ से हनुमंतराव ने अपने बच्चों के साथ छोटे भाइयों को भी पढ़ाया-लिखाया। एक भाई
कृषि में पोस्ट ग्रेजुएट होकर कृषि विभाग में तथा दूसरा भाई राष्ट्रपति भवन में
बॉडी गॉर्ड के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहा है। हनुमंत राव के खेती एवं सामुदायिक
विकास को देखते हुए उद्यानिकी विभाग द्वारा वर्ष 2016-17 में उन्हें हॉलैंड- नीदरलैंड की विदेश यात्रा पर भी भेजा
गया, जहाँ से फूलों की खेती
एवं विपणन के नए गुर सीख कर आये हनुमंतराव नई ऊर्जा से फूलों की खेती में लग गए
हैं।
हनुमंतराव की खेती से हो
रहे लाभ से गांव के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। इन किसानों ने सेवंती के
फूलों की खेती प्रारंभ की है। ये सभी किसान आपस में मिलजुल कर सेवंती की खेती करते
है और उत्पादित फूलों को मिलजुल कर बाजार में बेचते हैं। धीरे धीरे, वर्ष-दर-वर्ष गाँव में सेवंती के फूलों की खेती
करने वाले किसानों की संख्या बढ़ रही हैं। वर्तमान में गुनखेड़ गाँव का लगभग हर
किसान सेवंती के फूलों की खेती कर रहा है। इस समय गाँव में लगभग 70 एकड़ जमीन पर सेवंती के फूलों की खेती की जा
रही है। इसी वर्ष सेवंती की खेती से गाँव के किसानों को लगभग 2 करोड़ रूपये की आमदनी हुई है।
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