Sunday, March 25, 2018

मिर्च की उन्नत फसल (Advanced crop of chilli)

मिर्च की उन्नत फसल 

1.टमाटर व मिर्च की खेती एक ही खेत मे या नज़दीकी खेत मे न करें क्योंकि इनमे कीड़े व बीमारियाँ एक जैसी होती हैं । सहफसलों से एंथ्राक्नोज़ और बेक्टीरियल झुलस रोग फैल सकते हैं ।
2. अधिक रोग जनित मिट्टी की ऊपरी सतह पर होते हैं । कुछ किसान ऊपरी सतह(30cm) निकाल देते हैं व फिर निचली सतह पनीरी के लिए इस्तेमाल करते है । पनीरी गलन नहीं होता!
3. प्याज़ व धनिया के साथ मिश्रित खेती से अधिक आय मिलती है व नदीनों की संख्या कम करने मे भी सहायता मिलती है ।
4. यदि मिर्च के साथ प्याज़, लहसुन और गेंदे की मिश्रित खेती की जाये तो सूत्रकृमि की रोकथाम मे सहयोग मिलता है ।

बुवाई तकनीक

1.   भूमि की तैयारी: उचित जुताई विधि अपनाकर मिट्टी तैयार करें । 9-10 टन/ हेक्टेयर गोबर खाद डालें ।
2. असिंचित मिट्टी मे बुवाई के लिए समतल बेड व सिंचित भूमि के लिए उभरे हुए बेड उपयोग करें ।
उभरे हुए बेड को 25 फीट लंबा, 1 0फीट चौड़ा, 10से.मी ऊंचा या जरूरतानुसार तैयार करें । 30 किलो गाय का गोबर व ½ किलो सुफाला हर बेड पर डालें ।

किस्में


आन्ध्र ज्योति, झंकार, 7707, भाग्य लक्ष्मी, पूसा ज्वाला, पूसा सदाबहार, एन. पी 46 ए, पंजाब लाल, पंत सी, तेजस्विनी, मीनम, स्वस्ति, सी. एच 1, सी. एस 3, क्रांति, सोल्जर ,जुगनी , मिनम , सी एस -3 , विरजी , एन एस 1101  एन एस 1701, बायोलालिमा ।
उपरुक्त नाम सिर्फ जानकारी के आधार पर है ।

किसान भाई अपनी ईच्छा अनुसार कोई भी किस्म का चुनाव कर सकते है ।

क़िस्मों की शुद्धता व अशुद्धता के संदर्भ मे हम ज़िम्मेवार नहीं । किसान भाई बीज लेते वक्त बिल ज़रूर लें :

आईआईवीआर द्वारा विकसित की गई किस्में :
हाइब्रिड काशी अर्ली, काशी अनमोल, काशी सुर्ख

बीज उपचार

1.   बुवाई से पहले बीज का 3 ग्राम थिरम या 1 ग्राम कार्बेनडाज़िम(बाविस्टीन,सहारा)/ किलो बीज की दर से उपचार करें ।
2. रसायनिक उपचार के बाद, बीज को 5 ग्राम ट्राईकोडर्मा/ किलो बीज की दर से उपचारित करे । इन्हें छाँव मे रखें व इन्हे बुवाई हेतु उपयोग करें ।
3. मुरझान, रस चूसक कीट से सुरक्षा हेतु रोपाई से पहले जड़ों को ट्राईकोडर्मा हार्ज़ियानम@ 20 ग्राम/ लीटर + 0.5 मि. ली/ लीटर इमिडाक्लोप्रिड (कोन्फ़िडोर) मे 15 मिनट तक भिगोएँ ।
4. यदि आप माइकोराइज़ा से अंकुर का उपचार करते हैं तो इससे 50% तक सुपरफॉस्फेट व 25% तक नाइट्रोजन खाद की बचत होती है ।

खेत में 1.25मीटर चौड़े वा 15 सेंटी मीटर चौड़े बेड (मेड़) बनाए । इन क्यारिओ में 3-4 किलो/ वर्ग मीटर के हिसाब से गली सड़ी गोबर खाद डालें । इन क्यारिओं के बीच 30 सेंटी मीटर चौड़ी और 20 सेंटी मीटर गहरी नालियाँ बनाएँ ।
मिट्टी को कीटाणु रहित रखने हेतु 20 मि. ली फोरमैलिन को 1 लीटर में मिलाकर 2लीटर/ वर्ग मीटर के हिसाब से छिड़कें वा 2-3 दिन तक अच्छी तरह से लिफाफे या पन्नी से ढक्क दें । बुवाई 3-4 दिन बाद करे ।

1. बेड की चौड़ाई के समानांतर रेखा बनाएँ । हर बेड पर 15 ग्राम फोरेट 10G डालें । इसे मिट्टी से ढककर बीज रखें व फिर मिट्टी से ढक दें ।
2. पनीरी मे बीज की बुवाई के बाद, बेड को 400 मेश की नायलोन की जाली से या पतले सफ़ेद कपड़े से ढक दें । ये पौध को कीट-रोग लगने से बचाएगा ।
3. अंकुरण होने तक पौध को रोज़ाना पानी दें । बीज बोने से 15 दिन बाद 50 ग्राम यूरिया हर बेड पर डालें ।
4. पौध को भारी वर्षा से बचाने हेतु छायादार जाली से ढकना चाहिए । एक माह बाद ये जाली हटा दें नहीं तो पौध कमज़ोर होने लगती है ।

बुवाई व रोपण के तरीके

[Image Source: ICAR]
1.   30-40 दिन बाद, पौध रोपाई के लिए तैयार हो जाती है । रोपाई के लिए 6-8 हफ्ते की या 15-20 से.मी ऊंचाई वाली पौध चुनें ।
2. भरोसेयुक्त व अच्छे बीज ही उपयोग करें । बीज दर 40-60 ग्राम/ एकड़ ही रखें । 3x1 मीटर के बेड तैयार करें ।
3. लंबी व अधिक फैलाव वाली किस्मों हेतु पौधों में 60x60 से.मी का अंतर रखें । बौनी क़िस्मों हेतु 60x45 से.मी; कम सिंचित क्षेत्रों में रोपाई के लिए 45x45 से.मी का अंतर रखें ।

मिर्च लगाने के तरीके-
पहली विधि- खेत में 2.5ft(75cm) दूरी पर वट्टां डाल कर पौधे से पौधे का अंतर 45cm रखें । प्रति एकड़ 11765 पौधे लगते हैं । इस तरीके की लवाई में पानी एक खली छोड़ कर लगाने से पानी की बचत होती है और फसल को भी लाभ प्राप्त होता है ।

दुसरी विधि- खेत में 3ft (90cm) चौड़े बैड पर 1.5ft(45cm) खाली बना लें । बैड़ों के बीच लाईन में 30cm दूरी पर पौधे लगा दें । प्रति एकड़ 10000 पौधे लगेंगे । इस तरीके की लवाई में खरपतवारों की गुड़ाई और खाद ट्रैकटर के साथ डाल सकते हैं ।

तीसरी विधि - खेत में 3f t(90cm) चौड़े बैड पर 1.5ft(45cm) खली बना लें । एक बैड के 2 कतार 45cm दूरी पर लगाएँ । पौधे त्रीकोन आकार में लगाएँ । पौधे लगाते समय पौधे किनारे से 15-20 cm अंदर लगाएँ । इस तरीके से प्रति एकड़ 13034 पौधे लगते हैं ।

खरपतवार (नदीन) प्रबंधन

1.   खरपतवार(नदीन)- रोकथाम हेतु रोपण से एक या दो दिन पहले ऑक्सी फ्ल्यूरोफेन (गोल / ऑक्सीगोल्ड) 200 मि. ली/ 200 लीटर पानी में प्रति एकड़ छिड़कें ।
2. खरपतवार(नदीन) की रोकथाम हेतु रोपाई से 1 या 2 दिन पहले पेंडिमेथालिन (स्टोंप / स्पीड/ दोस्त) 1.3लीटर/ एकड़ 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें ।
3. अंतर कृषि: पहली गुड़ाई रोपण के 25 दिन बाद करनी चाहिए । खरपतवार (नदीनों) की तीव्रता के आधार पर गुड़ाई दोहराएँ और खेत को इनसे मुक्त करें ।

शस्य क्रिया

प्लास्टिक कल्चर व सटीक खेती

बिन मौसम वर्षा/ कम तापमान । पौध कम तापमान के प्रति नाज़ुक होती है । शाम को पनीरी को प्लास्टिक शीट या भूसे से ढकें । दिन में ये पलवार हटा दें ।

पॉली सुरंग - जल्दी फसल प्राप्ति हेतु दिसंबर शुरू मे खेत में 2.5 फीट चौड़े बैड बना दें । हर 2 मीटर पर एक रिंग लगाएँ । रिंग के सिरे 6 इंच तक दबाएँ । बैडों पर रिंग दबा कर उसके ऊपर 10 0 गेज़ की प्लास्टिक शीट डालें । एक तरफ से शीट को पूरा दबा दें और दूसरी तरफ थोड़े फासले में मिट्टी डाल दें ।

फसल पोषण

जैविक खाद

हर 1-2 साल में मिट्टी परीक्षण करवाने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति का पता चलता है, इस प्रकार उर्वरकों का विवेकपूर्ण एवं आर्थिक उपयोग होता है ।
बुवाई से 10-15 दिन पहले 6-8 टन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद/ एकड़ या 3-4टन केंचुआ खाद/ एकड़ डालें ।
मिट्टी जनित रोगों से बचाव हेतु ट्राइकोडर्मा व सूडोमोनास प्रत्येक 1-2 किलो प्रति एकड़ 50 किलो गोबर खाद में मिलाकर आखिरी जुताई से पहले खेत में बिखेरें ।
माइकोराइज़ा (रैलीगोल्ड/ ग्रोमोर) 4 किलो/ एकड़ आखिरी जुताई से पहले डालने से पौधे की फॉस्फोरस अवशोषण क्षमता को बढ़ाता है, जड़ों का विकास करता है जिससे उपज बढ़ती है ।

रासायनिक खाद

1. अच्छे विकास हेतु 62 किलो यूरिया, 312 किलो एसएसपी, 50 किलो एमओपी (30:50:30 एनपीके, 1 किलो/ एकड़) रोपाई के 10-12 दिन बाद पहली खुराक के तौर पर डालें।
2. खाद प्रबंधन- अच्छी बढ़त, उत्पादन के लिए 75 ग्राम एमएपी 12:61:00/ 15 लीटर पानी के साथ रोपाई के 40-45दिन बाद टहनी की बढ़त के समय डालें।
3. उपज बढ़ाने व अधिक मात्रा में फल लेने हेतु 10 किलो सल्फर/ बेन्सल्फ/ एकड़ व 10 ग्राम केल्शियम नाइट्रेट/ लीटर पानी फूल आते समय छिड़के।

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